Transport Workers Strike : आज ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स की देशभर में स्ट्राइक है. Telangana Gig and Platform Workers Union (Transport Workers Strike) और Indian Federation of App-Based Transport Workers से जुड़े ड्राइवरों और कर्मचारियों ने इस हड़ताल का आह्वान किया है.

जानकारी के मुताबिक स्ट्राइक ड्राइवर्स की घटती इनकम, बढ़ते शोषण और सरकार द्वारा न्यूनतम बेस किराया तय करने में लापरवाही के खिलाफ की जा रही है. Ola, Uber, Rapido, Porter और अन्य ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट सेवाओं के ड्राइवर इसमें हिस्सा लेंगे. यूनियनों के अनुसार, इस दौरान कैब और बाइक टैक्सी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.
यूनियनों के अनुसार मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 2025 के अस्तित्व में होने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों ने अभी तक न्यूनतम बेस किराया अधिसूचित नहीं किया है. इसका फायदा उठाकर एग्रीगेटर कंपनियां मनमाने ढंग से किराया तय कर रही हैं. यूनियनों का आरोप है कि कंपनियां किराया कम कर रही हैं, जबकि पूरा ऑपरेशनल जोखिम ड्राइवरों पर डाल रही हैं. इससे काम के घंटे बढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी कमाई लगातार घट रही है.
TGPWU के संस्थापक अध्यक्ष और IFAT के सह-संस्थापक और राष्ट्रीय महासचिव शेख सलाउद्दीन ने कहा कि 2025 के दिशानिर्देशों में किराया तय करने से पहले मान्यता प्राप्त यूनियनों से सलाह लेना अनिवार्य है, लेकिन सरकार की निष्क्रियता के कारण प्लेटफॉर्म कंपनियों द्वारा शोषण बढ़ रहा है.
Ola-Uber के साथ 3.5 मिलियन ड्राइवर रजिस्टर्ड
देश भर में Ola-Uber प्लेटफॉर्म पर लगभग 3.5 मिलियन ड्राइवर रजिस्टर्ड हैं. इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में होने की उम्मीद है. भोपाल में, Ola-Uber के साथ लगभग 15,000 वाहन रजिस्टर्ड हैं, जबकि Rapido के साथ लगभग 3,000 बाइक रजिस्टर्ड हैं. तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को न्यूनतम किराए की मांग करते हुए पत्र लिखा है.
गिग वर्कर्स ने 31 दिसंबर को हड़ताल की थी
इससे पहले, IFAT से जुड़े डिलीवरी वर्कर्स ने भी 31 दिसंबर, 2025 को देशव्यापी हड़ताल की थी. उस समय, विरोध प्रदर्शन 10 मिनट की डिलीवरी, कम वेतन, खराब काम करने की स्थिति और सामाजिक सुरक्षा की कमी के खिलाफ थे. इसमें Swiggy, Zomato, Blinkit और Zepto जैसी कंपनियों के राइडर्स शामिल थे. हड़ताल के बाद इन प्लेटफॉर्म्स ने अपनी ब्रांडिंग से 10 मिनट की डिलीवरी का दावा हटा दिया था. अब, वे अपने ऐप्स पर बस मिनटों में डिलीवरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं.
आम आदमी पार्टी (AAP) के एक सांसद ने ANI को बताया कि जहां बड़ी कंपनियां स्विगी-जोमैटो डिलीवरी बॉय, ब्लिंकिट-जेप्टो राइडर्स और ओला-उबर ड्राइवरों की कड़ी मेहनत से मुनाफा कमा रही हैं. वहीं इस पूरे इकोसिस्टम में गिग वर्कर्स को सबसे ज़्यादा दबाव और शोषण का सामना करना पड़ता है.
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