Rajasthan News: राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारियों के लिए अब प्रमोशन की राह केंद्र की गलियों से होकर गुजरेगी। केंद्र सरकार ने आईपीएस अधिकारियों के प्रमोशन नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए ‘सेंट्रल डेपुटेशन’ (केंद्रीय प्रतिनियुक्ति) की अनिवार्यता लागू कर दी है। अब एसपी और डीआईजी रैंक के अधिकारियों को आईजी (IG) बनने से पहले कम से कम दो साल केंद्र में सेवाएं देनी होंगी।

2011 बैच के बाद के अफसरों पर राइडर लागू
नए नियमों के मुताबिक, राजस्थान में 2011 बैच और उसके बाद के आईपीएस अधिकारियों पर यह शर्त (राइडर) लागू होगी। राजस्थान कैडर के कुल 212 आईपीएस अधिकारियों में से 120 अधिकारी इस नए नियम के दायरे में आ रहे हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला?
अक्सर देखा गया है कि राज्य कैडर के आईपीएस अधिकारी दिल्ली जाने या केंद्रीय सुरक्षा बलों (जैसे BSF, CRPF, CBI, IB) में सेवाएं देने से परहेज करते हैं। इसके कारण केंद्र में डीआईजी और एसपी स्तर के पद खाली रह जाते हैं। अब प्रमोशन के राइडर के जरिए केंद्र ने राज्यों से अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का रास्ता निकाला है।
प्रदेश पर बढ़ेगा काम का बोझ
एक तरफ केंद्र का दबाव है, तो दूसरी तरफ राजस्थान में आईपीएस अधिकारियों की पहले से ही कमी है। प्रदेश में कुल 222 पद सृजित हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 212 आईपीएस ही कार्यरत हैं। वर्ष 2024 के बाद प्रदेश को नए आईपीएस अधिकारी नहीं मिले हैं। यदि बड़ी संख्या में अधिकारी प्रमोशन के लिए केंद्र जाते हैं, तो फील्ड में तैनात अधिकारियों पर काम का अतिरिक्त भार बढ़ना तय है।
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