पटना/पूर्णिया। बिहार की राजनीति में शुक्रवार की आधी रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव को पुलिस ने उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी किसी नए मामले में नहीं, बल्कि 31 साल पुराने एक केस में हुई है, जिसमें उन पर धोखे से कमरा किराए पर लेने का आरोप है। पटना की विशेष अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की।

​हाई-वोल्टेज ड्रामा और गिरफ्तारी

​शुक्रवार रात करीब 12 बजे जब पुलिस की टीम पप्पू यादव के घर पहुंची, तो करीब तीन घंटे तक जबरदस्त ड्रामा चला। पुलिस ने जब उनसे चलने को कहा, तो सांसद ने दोटूक लहजे में इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, मैं रात में कहीं नहीं जाऊंगा, आप सुबह आइए। मुझे पता है कि जनहित के मुद्दे उठाने की सजा मुझे दी जा रही है। आप जिसके कहने पर आए हैं, उन्हें बता दीजिएगा कि मैं डरने वाला नहीं हूं।

हालांकि, पुलिस के कड़े रुख के बाद जब उन्हें ले जाया जाने लगा, तो धक्का-मुक्की के बीच पप्पू यादव बेहोश हो गए। उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी झड़प और हाथापाई भी हुई। समर्थक पुलिस की गाड़ी पर चढ़ गए और नारेबाजी करने लगे।

​अदालत का फैसला और स्वास्थ्य स्थिति

​शनिवार सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच पप्पू यादव को एम्बुलेंस से पटना सिविल कोर्ट लाया गया। कोर्ट ने उन्हें ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजने का आदेश दिया है। हालांकि, उनकी खराब सेहत को देखते हुए उन्हें फिलहाल जेल के बजाय पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) भेजा गया है। वे पुलिस की निगरानी में अस्पताल में ही अपना इलाज कराएंगे।

​राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विरोध

इस गिरफ्तारी ने बिहार से लेकर दिल्ली तक की सियासत गरमा दी है:
​राहुल गांधी: कांग्रेस सांसद ने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार देते हुए कहा कि यह जनता की आवाज दबाने की कोशिश है।
​प्रियंका गांधी: उन्होंने भी सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे बदले की भावना से प्रेरित बताया।

​कार्यकर्ताओं का आक्रोश

आरा समेत राज्य के कई हिस्सों में पप्पू यादव के समर्थकों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला फूंका।
​नोट: पप्पू यादव के खिलाफ इस पुराने मामले में कोर्ट ने उनके समेत तीन आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी किया था। फिलहाल समर्थकों में भारी आक्रोश है और अस्पताल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है।