राम मंदिर पर हमले की साजिश रचने के आरोपी संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की फरीदाबाद जेल में हुई हत्या के बाद जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना ने जेल के भीतर कैदियों की सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर बहस छेड़ दी है। सूत्रों के अनुसार, गंभीर मामलों में बंद तीन कैदियों को एक ही सेल में रखने के फैसले पर भी सवाल उठ रहे हैं। नियमों के तहत हाई-रिस्क कैदियों को अलग-अलग रखने की व्यवस्था होती है, इसके बावजूद एक ही सेल में रखने से सुरक्षा में चूक की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या जेल मैनुअल का उल्लंघन हुआ और सुरक्षा इंतजामों में कहां चूक हुई।

राम मंदिर पर हमले की साजिश रचने के आरोपी संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की फरीदाबाद जेल में हुई हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, एक कैदी ने नुकीले पत्थर से लगातार उस पर वार किया, जबकि बैरक में बंद तीसरा कैदी शोर मचाता रहा। शोर सुनने के बाद जब सुरक्षा कर्मी सेल तक पहुंचे, तब तक अब्दुल रहमान की मौत हो चुकी थी।

गंभीर रूप से घायल अवस्था में उसे तुरंत जेल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को बीके अस्पताल भेजा गया है। मामले में मंगलवार को बोर्ड से पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। घटना की सूचना मिलते ही एसीजेएम संचिता मौके पर पहुंचीं और मामले की जांच शुरू की। वहीं, पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सक्रिय नजर आया। डीसीपी सेंट्रल ऊषा कुंडू, एसीपी क्राइम वरुण दहिया, एसीपी अशोक कुमार सहित क्राइम ब्रांच और एफएसएल टीम ने घटनास्थल का दौरा कर साक्ष्य जुटाए।

अब्दुल रहमान की हत्या के आरोपी अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट को अक्टूबर 2024 में जम्मू-कश्मीर की जेल से फरीदाबाद की नीमका जेल लाया गया था। जम्मू में उसके खिलाफ हत्या सहित कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। सूत्रों के मुताबिक, करीब 20 दिन पहले अरुण चौधरी और अब्दुल रहमान को एक ही सेल में रखा गया था। उनके साथ तीसरा कैदी सुहेब रियाज भी उसी बैरक में बंद था। बताया जा रहा है कि जेल में बंद अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट ने पत्थर से अब्दुल रहमान पर हमला किया, जिससे कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई।

ATS, IB की मदद से पकड़ा गया था अब्दुल

राम मंदिर पर हमले की साजिश के आरोपी संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान को 2 मार्च को पाली से हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) फरीदाबाद ने गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई में गुजरात एटीएस और केंद्रीय एजेंसियों ने भी सहयोग किया था। गिरफ्तारी के दौरान जांच एजेंसियों को अब्दुल रहमान के पास से दो जिंदा हैंड ग्रेनेड बरामद हुए थे, जिन्हें मौके पर ही बम निरोधक दस्ते (BDS) की मदद से निष्क्रिय किया गया था। इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

अक्षय शर्मा हत्याकांड के बाद चर्चा में आया था अरुण

फरीदाबाद की नीमका जेल में अब्दुल रहमान की हत्या करने वाला आरोपी अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट जम्मू जिले के आरएस पुरा सेक्टर के गांव खौर देओनियन का निवासी है। उसका नाम दिसंबर 2023 में सांबा निवासी अक्षय शर्मा हत्याकांड के बाद चर्चा में आया था। वर्ष 2023 में पंजाब में हुई एक मुठभेड़ के बाद अरुण चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसे कठुआ जेल में रखा गया था। बाद में अक्टूबर 2024 में उसे फरीदाबाद की नीमका जेल में ट्रांसफर किया गया।

जोखिम मूल्यांकन प्रक्रिया का पालन नहीं

आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या के बाद जेल प्रशासन के फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खासतौर पर तीन गंभीर मामलों के तीन कैदियों को एक ही सेल में रखने के निर्णय को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर उंगलियां उठ रही हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाई-रिस्क या संवेदनशील मामलों में बंद आरोपियों को अलग-अलग निगरानी श्रेणियों में रखा जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की हिंसक घटना को रोका जा सके। हालांकि, इस मामले में ऐसा नहीं किया गया, जिसके चलते जेल के भीतर हत्या जैसी वारदात हो गई।

आखिर सेल में पत्थर कहां से आया

नीमका जेल के हाई-सिक्योरिटी सेल में बंद संदिग्ध आतंकी आरोपी की सह-कैदी द्वारा हत्या किए जाने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। यह घटना रात करीब दो बजे हुई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कड़ी सुरक्षा वाले वार्ड के भीतर पत्थर कैसे पहुंचा, जिससे हमला किया गया। इस संबंध में एसीपी अशोक कुमार ने बताया कि “जेल परिसर में काफी पत्थर पड़े थे”, लेकिन यह बयान सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है।

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