शब्बीर अहमद,भोपाल। राजधानी की हरियाली पर कुछ लोगों की बुरी नजर पर पड़ चुकी है। शहर की ग्रीनरी को खत्म किया जा रहा है वो भी पेड़ काटकर नहीं पेडों को स्लो प्वाइजन देकर। भोपाल में पेड़ों की हत्या करने का नया फॉर्मूला निकला गया है। पेड़ों को स्लो प्वाइजन देकर सुखाने की तैयारी की जा रही है। बाकायदा राजधानी के सबसे ज्यादा ग्रीन कवर वाले इलाके प्रोफेसर कॉलोनी में पेड़ों को सुखाने के लिए केमिकल डाला गया है जिसकी वजह से ना तो पेड़ों को काटने की अनुमति लेनी पड़े और पेड़ अपने आप सूखकर काटने लायक हो जाए।
नए तरीके से पेड़ों की हत्या
विकास के नाम पर राजधानी भोपाल में लाखों पेड़ों की बलि पहले ही चल चुकी है अब नए तरीके से पेड़ों की हत्या की जा रही है हालांकि कई प्रोजेक्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट से लेकर एनजीटी ने रोक लगाई मगर इसके बावजूद पेड़ों की हरियाली काम करने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। ऐसा ही मामला प्रोफेसर कॉलोनी का है। यहां वालों सालों पुराने हरे पेड़ों को सुखाने के लिए केमिकल डाला जा रहा है।
जहर देकर मारा जा रहा
पेड़ों में छेद करके उनमें केमिकल भर के मिट्टी लगा दी गई है, जिससे केमिकल का असर इतना गंभीर है कि पेड़ खड़े-खड़े सूख रहा है। हालांकि यह पहला प्रयोग नहीं है वहां पर लगे कई और सूखे पेड़ गवाही दे रहे हैं, उनमें लगे केमिकल इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि उन्हें पहले ही मार दिया गया। अब हर पर भरे पेड़ों का नंबर है, जिन पर सुराख करके केमिकल भर दिया गया है। यह वह पेड़ शामिल है जो लोगों को ऑक्सीजन के साथ-साथ फल भी देते हैं लेकिन अब उन्हें जहर देकर मारा जा रहा है।
पिछले 10 सालों में 6 लाख से अधिक पेड़ काटे गए
एनजीटी में अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राजधानी भोपाल में पिछले 10 सालों में 6 लाख से अधिक पेड़ काटे गए हैं। यानी की साल 2016 की तुलना में राजधानी का ग्रीन कवर एरिया काफी ज्यादा घटा है। महापौर मालती राय का कहना है कि अब मामला संज्ञान में आया है तो वहां पर जांच की बात कही है। कहा- हरियाली को नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। जिस प्रकार से यह पेड़ों को सुखाने का मामला आया है जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं कांग्रेस ने भी इस मामले में जांच की बात कही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
हरे-भरे पेड़ों को काटना यह अपराध की श्रेणी में
पर्यावरण एक्सपर्ट नूर राशिद खान का कहना है यह पूरी तरीके से कानूनी मामला हो गया है। पेड़ों को काटने के लिए यह नया तरीका अपनाया जा रहा है। ऐसे में हरे-भरे पेड़ों को काटना यह अपराध की श्रेणी में है। दूसरा वह रामसर साइट से जुड़ा हुआ है। इसलिए वहां पर अनुमति निर्माण की नहीं होनी चाहिए। पुरानी अनुमति के आधार पर निर्माण किया जा रहा है। इस मामले में पेनल्टी भी लगानी चाहिए।
नगर निगम क्या कर रहा
कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता का कहना है कि भोपाल पहले ही हरियाली की मार झेल रहा है। यहां पर हरियाली की लगातार कमी होती जा रही है। इसके बावजूद विकास के नाम पर अलग-अलग तरीके से पेड़ काटे जा रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर इन पेड़ों की देखरेख करने वाला विभाग नगर निगम क्या कर रहा है। जिस जगह पर पेड़ों को काटने के लिए ऐसे सुराख किए गए हैं। वहां पर निगरानी करने वाले जिम्मेदार के खिलाफ भी एक्शन लेने चाहिए।
भोपाल में ऐसी हुई हरियाली की बलि
भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट: 40,000 से अधिक पेड़ काटे गए
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट: लगभग 2,884 से अधिक पेड़ काटे गए
सड़क चौड़ीकरण और निर्माण (जैसे नीलबड़-मुगलिया छाप): 20,000-30,000 से अधिक पेड़ (तीन साल में)
वीवीआईपी बंगलों (शिवाजी नगर/तुलसी नगर) का पुनर्विकास: लगभग 27,000 से 29,000 पेड़ काटे जाने की योजना थी
खनन परियोजनाएं: शहर से 15 किमी दूर 6,000 से अधिक पेड़
इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स (नीलबड़): सैकड़ों पेड़ काटे गए
कुल क्षति: एक रिपोर्ट के अनुसार 10 साल में 5 लाख पेड़ कम हुए हैं
पर्यावरण प्रभाव: शहर का ग्रीन कवर 22-26% तक घट गया है, जिससे तापमान और प्रदूषण में वृद्धि हुई है।
राजधानी में पेड़ सिर्फ नाम मात्र के बच जाएंगे
प्रतिपूरक वृक्षारोपण: कानूनन काटे गए पेड़ों के बदले पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन पुरानी प्रजातियों के हरे-भरे पेड़ों की भरपाई मुश्किल है। अभी जरूरी है की नगर निगम के पास जब यह बात की जानकारी मिल गई है तो संबंधित के खिलाफ एक्शन लिया जाए…क्योंकि अगर ऐसा सबसे शुरू किया तो राजधानी में पेड़ सिर्फ नाममात्र के बच जाएंगे। जो पेड़ ऑक्सीजन देते हैं उनका भी बचाना जरूरी है क्यों की हरियाली रहेगी तो इंसान स्वच्छ हवा में सांस ले पाएगा नहीं तो सिंगरौली जैसी स्थिति भोपाल की भी जल्द हो जाएगी।

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