दिल्ली और गुड़गांव के बीच यात्रा करना अक्सर शाम के समय एक बड़ी चुनौती बन जाती है। लंबी ट्रैफिक लाइनों और घंटों फंसने के बाद commuters परेशान रहते हैं। लेकिन जल्द ही यह मुश्किल भूतकाल की बात हो सकती है। गुड़गांव के ऑफिस से निकलते ही अब आप लिफ्ट के जरिए छत पर पहुंचेंगे और वहां खड़ी एयर टैक्सी में बैठकर सीधे दिल्ली के कनॉट प्लेस तक उड़ान भर सकते हैं। यह कोई विज्ञान कथा नहीं है, बल्कि भारत का अगला बड़ा ट्रांसपोर्ट इनोवेशन है। सरकार और निजी कंपनियों ने इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू कर दिया है, ताकि आने वाले सालों में सिटी ट्रैवल को तेज, सुरक्षित और स्मार्ट बनाया जा सके।

हवा में बनेगा ‘vip कोरिडोर

कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने भारत का पहला एयर टैक्सी कोरिडोर तैयार करने का खाका पेश किया है। इस प्रस्तावित रूट के तहत गुड़गांव, दिल्ली के कनॉट प्लेस और नोएडा के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक सुपरफास्ट हवाई मार्ग से जोड़ा जाएगा। CII के अनुसार इस कोरिडोर का मुख्य उद्देश्य है सड़कों पर रेंगती गाड़ियों और मेट्रो की भीड़भाड़ से छुटकारा दिलाना और यात्रियों को तेज, सुविधाजनक और सुरक्षित ट्रैवल विकल्प प्रदान करना।

इस प्लान की सबसे बड़ी खासियत इसका इंफ्रास्ट्रक्चर है। इन इलेक्ट्रिक एयर टैक्सियों को उड़ान भरने के लिए किसी बड़े एयरपोर्ट या लंबे रनवे की जरूरत नहीं होगी। ये हेलीकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर उठेंगी और शहरों में महंगी जमीन के चलते ऊँची इमारतों, अस्पतालों और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स की छतों पर लैंड करेंगी। जो छतें अभी खाली पड़ी हैं, वे भविष्य में एयर टैक्सी स्टैंड बन जाएंगी।

तीन चरणों में लागू होगा प्रोजेक्ट

एयर टैक्सी प्रोजेक्ट को तीन चरणों में लागू किया जाएगा, इसलिए शुरुआत में अभी लोगों को इसका इस्तेमाल नहीं मिलेगा।

फेज 1 – ड्रोन और मेडिकल ट्रायल: शुरुआती दौर में इन रूट्स पर ड्रोन डिलीवरी और मेडिकल इमरजेंसी सेवाओं का परीक्षण होगा।

फेज 2 – एयर एम्बुलेंस: इसका सबसे बड़ा फायदा मरीजों को होगा। ऑर्गन ट्रांसप्लांट और गंभीर मरीजों को ट्रैफिक जाम से बचाने के लिए एयर एम्बुलेंस सेवाएं चलाई जाएंगी।

फेज 3 – यात्रियों के लिए: जब सुरक्षा और तकनीक पूरी तरह परखी जाए, तब आम लोगों के लिए एयर टैक्सी की बुकिंग शुरू होगी।

एयर टैक्सी प्रोजेक्ट में नियम और फंडिंग की तैयारी

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) एयर टैक्सी सेवाओं के लिए विशेष नियम बनाने में जुटा है। इसके साथ ही एक अलग रेगुलेटरी बॉडी बनाने पर भी विचार चल रहा है। प्रोजेक्ट की फंडिंग को लेकर सुझाव दिया गया है कि बैंकों और सरकारी एजेंसियों की मदद ली जाए, ताकि कंपनियों के लिए वित्तीय जोखिम कम किया जा सके और एयर टैक्सी सेवाओं का संचालन सुचारू हो।

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