अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वॉशिंगटन पहुंच गए हैं. उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों पर पाबंदी और ईरान समर्थित गुटों को मिलने वाले समर्थन को रोकने जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे. दिलचस्प ये है कि नेतन्याहू के अमेरिका आने के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पास एक दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात कर दिया है. अटकलें ऐसी लगाई जा रही हैं कि ये मुलाकात तो बहाना है, दरअसल वो मिलकर ईरान के लिए नई स्ट्रैटजी तैयार कर रहे हैं.
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वॉशिंगटन पहुंचे हैं. इसी दौरान अमेरिका ने ईरान के पास दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात करने की तैयारी तेज कर दी है.
नेतन्याहू ने संकेत दिए हैं कि वे ट्रंप के सामने ईरान से चल रही वार्ताओं के वो जरूरी सिद्धांत रखेंगे, जो न केवल इजरायल बल्कि पूरे मध्य-पूर्व की सुरक्षा के लिए अहम हैं. इजरायल लंबे समय से चाहता है कि किसी भी समझौते में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय नेटवर्क को भी शामिल किया जाए. इजरायल, ईरान का पड़ोसी देश है और उसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सबसे ज्यादा ऐतराज रहा है.
इन सबके बीच अमेरिका ने अपने झंडे वाले वाणिज्यिक जहाजों को ईरानी जलक्षेत्र से दूर रहने की सलाह जारी की है, जिससे क्षेत्र में सैन्य सतर्कता का स्तर और बढ़ गया है.
हालांकि सैन्य दबाव के साथ-साथ कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं. पिछले शुक्रवार ओमान में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच जून में हुए संघर्ष के बाद पहली बार सीधी बातचीत हुई. ट्रंप ने कहा कि वार्ता का दूसरा दौर अगले हफ्ते हो सकता है. उन्होंने चेतावनी भी दी थी कि या तो हम समझौता करेंगे या फिर हमें पिछली बार की तरह बहुत कड़ा कदम उठाना पड़ेगा.
तेहरान का रुख इस मामले में साफ है. ईरान का कहना है कि वह केवल अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करेगा और यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से पीछे नहीं हटेगा. हालांकि उसकी ओर से ये भी कहा गया है कि अगर अमेरिका अपने सारे प्रतिबंधों को हटा ले, तो वो अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को 60 फीसदी तक घटा सकता है.
कुल मिलाकर अमेरिका-ईरान मामले में एक तरफ कूटनीति की कोशिशें चल रही हैं, तो दूसरी ओर सैन्य दबाव भी बढ़ाया जा रहा है. आने वाले दिनों में यह तय होगा कि मामला समझौते की ओर बढ़ता है या टकराव की दिशा में.
ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली लारिजानी ने ओमान के सुल्तान और विदेश मंत्री से मुलाकात की है. लारिजानी ने सोशल मीडिया पर इजरायल की भूमिका को विनाशकारी बताते हुए अमेरिका को सतर्क रहने की सलाह दी.
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