शिखिल ब्यौहार/शब्बीर अहमद, भोपाल। वंदे मातरम (Vande Matram) की अनिवार्यता पर मध्य प्रदेश में सियासत शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे देश के लिए मंत्र बताया साथ ही विपक्ष पर जमकर हमला भी बोला हैं। बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस ने जिन्ना के सामने घुटने टेके और मुस्लिम लीग की डर से वंदे मातरम अनिवार्य नहीं किया। वहीं कांग्रेस पार्टी ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि जिन्होंने आजादी में भाग नहीं लिया, वह वंदे मातरम का महत्व बता रहे है।

बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कारण वंदे मातरम अनिवार्य नहीं हुआ था। जिन्ना के सामने नतमस्तक कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के डर से वंदे मातरम से किनारा किया था। वास्तविक वंदे मातरम को छोटा कर दिया गया और अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया, यह काम कांग्रेस ने किया है।

उसी दिन अनिवार्य हो जाना चाहिए था- बीजेपी

रामेश्वर शर्मा ने आगे कहा कि अनिवार्य तो उसी दिन हो जानी चाहिए थी, जिस दिन वंदे मातरम के जयघोष के साथ आजादी मिली, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि कांग्रेस ने आजादी के समय वंदे मातरम गाया तो पर वंदे मातरम की अनिवार्यता उसी दिन खत्म कर दी। कांग्रेस ने जिन्ना के सामने घुटने टेके और मुस्लिम लीग के डर से वंदे मातरम के साथ ही अन्याय किया। कई अंश काट दिए गए, जिससे आधा अधूरा वंदे मातरम कर दिया गया और उसके अनिवार्यता को टोटल खत्म कर दिया गया।

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वंदे मातरम देख के लिए एक मंत्र- विधानसभा अध्यक्ष

एमपी विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि वंदे मातरम तो देश के लिए एक मंत्र है। यह अनिवार्य बहुत पहले हो जाना चाहिए था लेकिन नहीं हो पाया। अब पीएम नरेंद्र मोदी धीरे-धीरे सभी चीजों को सुधार कर रहे हैं और तेज गति से सुधार कर रहे हैं।

कांग्रेस बोली- आजादी की याद दिलाता है वंदे मातरम

कांग्रेस नेता व पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि जिन्होंने आजादी में भाग नहीं लिया, वह वंदे मातरम का महत्व बता रहे है। वंदे मातरम हमेशा से हर कार्यक्रम में अनिवार्य रहा है और यह आजादी की याद दिलाता है। उन्होंने आगे कहा कि मदरसों के नाम पर राजनीति की जा रही है। मदसरे में हमेशा वंदे मातरम गाया जाता है। गाने का दर्द तुम क्या जानो, जिन्होंने आजादी की लड़ाई ही नहीं लड़ी। मोदी और उनकी सरकार सिर्फ दिखावा करती है। यह भी सिर्फ राजनीति है।

आरिफ मसूद ने कहा- हम गाएं या न गाएं

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि हमने खड़े होने के लिए कभी मना नहीं किया था। रिस्पेक्ट से हमें कोई एतराज नहीं था। गाने के कुछ शब्दों से लोगों को आपत्ति थी। मजहबी आजादी पर हमला था। कौन सा पैरा जोड़ा गया है या हटाया गया है यह एक बार देखना होगा। राष्ट्रगीत के बहुत सारे शब्दों पर हमें पहले आपत्ति थी, जिस पर हम निर्णय लेंगे। वंदे मातरम की हम रिस्पेक्ट करते हैं, उससे हमें कोई एतराज नहीं है। बात गाने की है हम गाएं या न गाएं।

केंद्र सरकार ने जारी किया है ये निर्देश

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर नया दिशा निर्देश जारी किया हैं। अब सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम अनिवार्य होगा। राष्ट्रपति-राज्यपाल कार्यक्रमों में लागू होगा। तिरंगा फहराने पर भी अनिवार्य होगा। 6 अंतरों वाला पूरा संस्करण अनिवार्य होगा। वहीं सम्मान में खड़ा होना जरूरी होगा। जन गण मन से पहले वंदे मातरम बजेगा। इसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड तय की गई है।

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