नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान वामपंथी उग्रवाद (LWE) पर चर्चा के दौरान सांसद राजीव शुक्ला ने छत्तीसगढ़ से नक्सल विरोधी अभियान को मिल रही भारी सफलता का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि नक्सली तो खत्म हो रहे हैं, लेकिन नक्सलवाद को भी खत्म करना है, इसके लिए पुनर्वास राशि को फिर से मंजूरी देने के साथ पुलिस फोर्स को भी मजबूत करना है.
सांसद राजीव शुक्ला ने राज्यसभा में वामपंथी उग्रवाद पर चर्चा में भाग लेते हुए साफ-सरल शब्दों में कहा कि इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह सबका संयुक्त प्रयास है. अटल जी की सरकार, मनमोहन सरकार में भी और अब मोदी जी की सरकार में केंद्र और राज्य मिलकर इस समस्या को खत्म कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार थी, तब केंद्र से मिलकर, जब अमित शाह गृह मंत्री थे, इस दिशा में काम किया. और अबकी सरकार भी यह कर रही है. निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी ऑपरेशन को भारी सफलता मिली है. इसमें कोई शक नहीं है.
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पूर्व में 15 लाख रुपए की सहायता नक्सल प्रभावित जिलों को मिला करता था. लेकिन नक्सलवाद जैसे-जैसे खत्म होता गया, यह सहायता खत्म कर दी गई. पुनर्वास के लिए यह राशि जिलों को जानी चाहिए, भले ही सरकार किसी की भी हो.
इसके साथ ही उन्होंने पुलिस स्टेशनों को साधन संपन्न बनाने की बात कही. उन्होंने कहा कि भले ही यह कहा जाता रहा है कि पुलिस साधन संपन्न है, लेकिन पुलिस स्टेशनों में अभी भी स्थिति खराब है. उपकरण और गाड़ियां इतनी नहीं है कि वो नक्सलियों का मुकाबला कर सकें. नक्सल तो खत्म हो रहे हैं, लेकिन नक्सलवाद भी खत्म करना है. इसके लिए पुनर्वास बहुत जरूरी है. इसके साथ पुलिस फोर्स को भी मजबूत करना है.
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