रायपुर। केंद्र सरकार के नए श्रम कानूनों और सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण के विरोध में ट्रेड यूनियनों ने आज देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. इस हड़ताल का छत्तीसगढ़ में भी असर देखने को मिल रहा है, जहां विभिन्न जिलों में श्रमिक संगठनों और कर्मचारियों ने कामकाज प्रभावित कर विरोध-प्रदर्शन किया.
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रायपुर के पंडरी स्थित एलआईसी बिल्डिंग के सामने बड़ी संख्या में कर्मचारी एकत्रित हुए और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नए श्रम कानून श्रमिकों के संगठन बनाने के अधिकार, सामूहिक सौदेबाज़ी की ताकत और 8 घंटे के कार्य-दिवस की व्यवस्था को कमजोर करती हैं. इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई.

यह हड़ताल देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और 100 से अधिक जन संगठनों के संयुक्त आह्वान पर बुलाई गई है. संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि मजदूर संगठनों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भी हड़ताल का समर्थन करते हुए मांगों को जायज़ बताया है.

ट्रेड यूनियनों ने केवल रायपुर में ही नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में प्रदर्शन किया. नगर के नेहरू चौक पर केंद्रीय ट्रेड यूनियन और संस्थाएं धरना दे रही हैं. ट्रेड यूनियन पदाधिकारियों ने सरकार के खिलाफ अनेक आरोप लगाया है. कांग्रेस ने ट्रेड यूनियन के हड़ताल का समर्थन किया है.

ट्रेड यूनियन की हड़ताल का ऊर्जाधानी कोरबा पर भी असर पड़ा है. श्रमिक नेताओं के अलावा कांग्रेस के कार्यकर्ता भी खदान बंद करने पहुंचे. हड़ताल का कोयला खदानों पर खासा असर देखने को मिला. कुसमुंडा खदान में भी सुबह से ही फर्स्ट ड्यूटी जाने वाले कर्मचारियों से श्रमिक नेता ने निवेदन करते हुए उन्हें इस हड़ताल का समर्थन मांगा जहां लोग समर्थन देते हुए नजर आए, ऐसा ही नजारा मानिकपुर खदान में भी देखने को मिला.
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