पटना/ राजधानी में ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए ‘भारत बंद’ का बिहार में व्यापक असर देखने को मिल रहा है। पटना के डाकबंगला चौराहे से लेकर कटिहार के नेशनल हाईवे तक प्रदर्शनकारियों ने मोर्चा खोल दिया है। मजदूर संगठनों और वामपंथी दलों ने केंद्र सरकार के चार नए श्रम कोड को गुलामी का प्रतीक बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग की है।

​राजधानी पटना में भारी प्रदर्शन

​पटना का डाकबंगला चौराहा आज आंदोलन का केंद्र बना रहा, जहां लगभग 2000 प्रदर्शनकारी जुटे। भाकपा माले की MLC शशि यादव ने विरोध का नेतृत्व करते हुए कहा कि नए कानून 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर देंगे, जिससे कर्मचारियों के अधिकार छिन जाएंगे। प्रदर्शन के कारण शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ठप नजर आई।

​NH-31 जाम, एंबुलेंस कर्मियों का भी विरोध

​कटिहार: प्रदर्शनकारियों ने NH-31 को पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं।
​दरभंगा: राष्ट्रीय एंबुलेंस कर्मचारी संघ (ऐक्टू) के सदस्यों ने बाजू पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया।
​नालंदा: हरनौत में सफाईकर्मियों की हड़ताल के कारण सड़कों पर कूड़े का अंबार लग गया है।
​अन्य जिले: मधेपुरा, आरा और बक्सर में भी बैंक कर्मियों और मजदूरों ने सड़क जाम कर नारेबाजी की।

​क्यों हो रहा है विरोध?

​मजदूर संगठनों का मुख्य विरोध 4 नए श्रम कोड को लेकर है। पटना नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार के अनुसार, नए नियमों से 8 घंटे काम की मर्यादा, न्यूनतम मजदूरी, PF, ESI और ग्रेच्युटी जैसे हक खत्म हो जाएंगे। सबसे बड़ी आपत्ति यूनियन बनाने की शर्त पर है, पहले 25 लोग मिलकर यूनियन बना सकते थे, लेकिन अब इसके लिए 300 लोगों की जरूरत होगी, जिससे छोटे संगठनों का अस्तित्व खतरे में है।

​जरूरी सेवाएं प्रभावित

​इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण बैंकिंग, बिजली, बीमा, परिवहन और जलापूर्ति जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि ये काले कानून वापस नहीं लिए गए, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और भी उग्र होगा।