अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। मजदूर व किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ विभिन्न संगठनों के बैनर तले गुरुवार को अखिल भारतीय आम हड़ताल के तहत शहर की सड़कों पर प्रदर्शन हुआ। दरअसल यह प्रदर्शन केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, संगठनों का संयुक्त मंच एवं संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी आह्वान पर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम कानूनों समेत अन्य मजदूर व किसान विरोधी नीतियों के विरोध में निकाला गया और प्रदर्शन के माध्यम से सभी संगठनों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी एकजुटता दिखाई।

विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध

विभिन्न संगठनों के तत्वाधान में आयोजित प्रदर्शन के माध्यम से चार नए श्रम कानूनों को रद्द करने, किसानों की कर्ज माफी सहित मनरेगा के तहत काम की गारंटी व उचित मजदूरी देने की मांग करते हुए बिजली बिल संशोधन विधेयक व बीज अधिनियम का विरोध किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाथों में झंडे और तख्तियां लेकर शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए नारेबाजी की। विरोध प्रदर्शन पुरानी जीटी रोड होते हुए बौलिया मोड़, धर्मशाला मोड़, पोस्ट ऑफिस चौराहा, कचहरी मोड़, फजलगंज से वापस कुशवाहा सभा भवन तक निकाली गई।

सरकार की नीतियां मजदूर व किसान विरोधी

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे मजदूर नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि नया लेबर कानून देश के श्रमिकों को गुलाम बनाने वाला है। दरअसल केंद्र में बैठी मोदी सरकार देश से लोकतंत्र को खत्म करने की एक गहरी साजिश कर रही है। यदि सरकार इन जनविरोधी नीतियों को वापस नहीं लेती है, तो यह आंदोलन और भी तेज होगा।