लक्ष्मीकांत बंसोड़, बालोद। जिले के तुएगोंदी गांव में वर्ष 2022 में हुए विवाद और मारपीट के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। गुरुवार को करीब 70 आदिवासी ग्रामीण अपने गांव से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर कलेक्टर से मुलाकात करने बालोद कलेक्ट्रेट पहुंचे। हालांकि, उन्हें कलेक्ट्रेट परिसर के मुख्य द्वार पर ही पुलिस ने रोक दिया। ग्रामीणों ने गेट के सामने बैठकर अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और प्रशासन से सीधे संवाद की मांग की।

ग्रामीणों का आरोप है कि हाल ही में मंत्री परिषद की बैठक में इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताया गया और कलेक्टर के माध्यम से न्यायालय को पत्र भेजकर प्रकरण खारिज करने की अनुशंसा की गई है। उनका कहना है कि यह कदम उनके साथ अन्याय है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे अपनी “जल, जंगल और जमीन” तथा पारंपरिक संस्कृति की रक्षा की बात कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, 1 मई 2022 को बालोद जिले के मंचुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत तुएगोंदी सरहद स्थित जामड़ीपाठ पाटेश्वर धाम मंदिर परिसर में कुछ स्थानीय आदिवासी ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाज के तहत बकरे और मुर्गे की बलि दी गई थी। इस घटना का कुछ हिंदू संगठनों ने विरोध किया और मंदिर को अपवित्र करने का आरोप लगाया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

विवाद ने जल्द ही हिंसक रूप ले लिया। दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडे चले, जिसमें कई लोग घायल हुए। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया और करीब दस लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया। तब से यह प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है।

ग्रामीणों की मांग

कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों का कहना है कि वे निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहते हैं। उनका आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर की जा रही कार्रवाई से उन्हें आशंका है कि उनके पक्ष को पर्याप्त रूप से नहीं सुना जा रहा। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाना चाहते हैं और किसी भी प्रकार के टकराव के पक्ष में नहीं हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की दृष्टि से ग्रामीणों को कलेक्ट्रेट गेट पर रोका गया था। हालांकि, उनकी मांगों को ज्ञापन के माध्यम से स्वीकार करने की बात कही गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और कानून के दायरे में ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

घटना के बाद क्षेत्र में एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संवाद की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और न्यायालय में लंबित मामले का क्या परिणाम सामने आता है।

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H