MS Dhoni Defamation Case: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से जुड़े मानहानि मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने धोनी को आदेश दिया है कि वह 10 लाख रुपये की राशि जमा करें। यह रकम मुकदमे से संबंधित सीडी सामग्री के ट्रांसक्रिप्शन (लिप्यंतरण) और अनुवाद पर आने वाले खर्च के लिए निर्धारित की गई है। कोर्ट ने यह राशि 12 मार्च 2026 तक जमा करने के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि यह मामला वर्ष 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी विवाद से जुड़ा हुआ है। धोनी ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मानहानि दावा दायर किया है। धोनी का आरोप है कि संपत कुमार ने उन्हें आईपीएल 2013 के कथित सट्टेबाजी घोटाले से जोड़ते हुए उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया।
अंतरिम आदेश में कोर्ट की टिप्पणी
इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आर.एन. मंजुला ने 11 फरवरी को अंतरिम आदेश पारित किया। अदालत ने अपने पूर्व आदेश (दिनांक 28 अक्टूबर 2025) का उल्लेख करते हुए कहा कि सीडी में उपलब्ध सामग्री का ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद का कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। यह कार्य अदालत के आधिकारिक इंटरप्रेटर को सौंपा गया है।
कोर्ट ने माना कि सीडी की सामग्री व्यापक और समय लेने वाली है। न्यायालय के अनुसार, इस काम को पूरा करने में एक इंटरप्रेटर और एक टाइपिस्ट को लगभग तीन से चार महीने तक लगातार कार्य करना पड़ेगा। इसी आधार पर अदालत ने कुल खर्च 10 लाख रुपये निर्धारित किया है।
खर्च वहन करेंगे वादी
अदालत ने स्पष्ट किया कि सामान्य परिस्थितियों में वादी (मुकदमा दायर करने वाला पक्ष) स्वयं ऐसे दस्तावेजों का ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद कराकर न्यायालय में प्रस्तुत करता है। हालांकि, इस मामले में विशेष परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने अपने आधिकारिक इंटरप्रेटर को यह कार्य सौंपा है। ऐसे में इस प्रक्रिया पर आने वाला खर्च भी वादी, यानी महेंद्र सिंह धोनी को ही वहन करना होगा।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि इंटरप्रेटर मार्च 2026 के तीसरे सप्ताह तक सीडी के सभी कंटेंट का ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद पूरा कर लें।
12 मार्च को अगली सुनवाई
अदालत ने धोनी को निर्देश दिया है कि वह 10 लाख रुपये की राशि 12 मार्च 2026 तक मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रिलीफ फंड के खाते में जमा करें। मामले की अगली सुनवाई भी 12 मार्च 2026 को ही निर्धारित की गई है।
यह मामला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय क्रिकेट के इतिहास के एक चर्चित विवाद से जुड़ा होने के कारण भी सुर्खियों में है। अब सभी की निगाहें 12 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में आगे की दिशा स्पष्ट होगी।
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