गोविंद पटेल, कुशीनगर. जनपद में छुट्टा पशुओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. बीते एक सप्ताह के भीतर आवारा सांड और बछड़ों के हमले में दो किसानों की मौत हो गई, जबकि एक किसान गंभीर रूप से घायल होकर मेडिकल कॉलेज में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है. घटनाओं के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है.

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बता दें कि हाटा कोतवाली क्षेत्र के भिस्वा गांव में गेहूं की फसल चर रहे आवारा बछड़ों को भगाने गए किसान मिठ्ठू यादव और मल्लू प्रजापति पर पशुओं के झुंड ने हमला कर दिया. गंभीर रूप से घायल मल्लू प्रजापति ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जबकि मिठ्ठू यादव की हालत नाजुक बनी हुई है.. वहीं कसया थाना क्षेत्र के नैका छपरा गांव में छुट्टा सांड के हमले में मदन सिंह की भी जान चली गई.

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गौरतलब है कि वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर गो-आश्रय स्थल बनाने की घोषणा हुई थी. लाखों रुपये खर्च कर केंद्र बनाए गए, लेकिन स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति न होने से अधिकांश आश्रय स्थल बंद पड़े हैं. नतीजतन, ग्रामीण इलाकों में छुट्टा पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है और अब ये किसानों की फसलों के साथ उनकी जान के भी दुश्मन बन गए हैं. सवाल उठता है. इन मौतों का जिम्मेदार कौन, क्या प्रशासन ठोस कदम उठाएगा या किसानों की जान यूं ही जाती रहेगी.