मुजफ्फरपुर। जिले के बहुचर्चित खुशी अपहरण मामले में पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीबीआई (CBI) को फटकार लगाते हुए दो सप्ताह के भीतर अब तक की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि मासूम खुशी को तलाशने के लिए जांच एजेंसी ने अब तक धरातल पर क्या ठोस कदम उठाए हैं।
अमन पर टिकी जांच की सुई
इस पूरे मामले की कड़ियां मोतिहारी (चकिया) निवासी अमन पर आकर टिक गई हैं। चश्मदीदों और साक्ष्यों के अनुसार, जिस दिन खुशी गायब हुई थी, उसे आखिरी बार अमन की बाइक पर देखा गया था। हालांकि अमन फिलहाल हाईकोर्ट से मिली जमानत पर बाहर है। सीबीआई ने अब उसकी जमानत रद्द करने की अर्जी दाखिल की है ताकि उसे रिमांड पर लेकर फिर से पूछताछ की जा सके और मामले का खुलासा हो सके।
ऑडियो रिकॉर्डिंग ने बढ़ाई उलझन
सीनियर एडवोकेट ओम प्रकाश ने कोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जांच में एक अहम ऑडियो रिकॉर्डिंग को नजरअंदाज किया गया है। इस रिकॉर्डिंग में दावा किया गया है कि खुशी मुजफ्फरपुर और पटना के बीच कहीं सुरक्षित है और महज दो लाख रुपये खर्च करने पर उसका सुराग मिल सकता है। अधिवक्ता का आरोप है कि सीबीआई ने इस महत्वपूर्ण इनपुट पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।
5 साल का लंबा इंतजार
यह मामला 5 साल पुराना है, जब लक्ष्मी चौक निवासी सब्जी विक्रेता राजा साह की 4 वर्षीय बेटी खुशी सरस्वती पूजा पंडाल से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। स्थानीय पुलिस की विफलता के बाद पिछले तीन वर्षों से हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई इसकी जांच कर रही है, लेकिन अब तक खुशी का कोई पता नहीं चल पाया है।
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