प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली में सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थित हैं। सेवा तीर्थ परिसर की दीवार पर ‘नागरिक देवो भव’ का आदर्श वाक्य अंकित है। केंद्र सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि नई इमारतें भारत की प्रशासनिक शासन संरचना को दर्शाती हैं। बता दें कि इससे पहले, प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा समिति सचिवालय, और कैबिनेट सचिवालय अलग-अलग स्थानों पर स्थित थे।
PM ने PMO, NSCS और कैबिनेट सेक्रेटेरिएट वाले कॉम्प्लेक्स का नाम सेवा तीर्थ रखा है। 2014 से, मोदी सरकार ने भारत के पुराने जमाने के निशानों से दूर जाने और सोच बदलने के लिए लगातार कदम उठाए हैं. कुछ बड़े बदलाव इस तरह हैं। सेवा तीर्थ कॉम्पलेक्स कॉम्प्लेक्स में 3 इमारतें हैं।
शाम 6 बजे करेंगे पीएम मोदी संबोधित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम करीब 6 बजे सेवा तीर्थ के साथ कर्तव्य भवन-1 और 2 का उद्घाटन करेंगे. इसके बाद उनका संबोधन भी होगा. सेवा तीर्थ में शिफ्ट होने से पहले PM मोदी साउथ ब्लॉक में केंद्रीय कैबिनेट की विशेष बैठक करेंगे. यह साउथ ब्लॉक में मोदी कैबिनेट की आखिरी बैठक होगी. इसके बाद सभी बैठकें नए ऑफिस में होगी।
इन जगहों के बदल गए नाम
- साउथ ब्लॉक → सेवा तीर्थ
- सेंट्रल सेक्रेटेरिएट → कर्तव्य भवन
- राजपथ → कर्तव्य पथ
- रेस कोर्स रोड → लोक कल्याण मार्ग
- राजभवन/राज निवास → लोक भवन/लोक निवास
एक छत के नीचे पूरी सरकार
सेवा तीर्थ को सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत ही डेवलप किया गया है. यह 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला आधुनिक परिसर दारा शिकोह रोड पर मौजूद है। इसे लगभग ₹1,189 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। पहले जो ऑफिस अलग-अलग हुआ करते थे. अब वह एक ही कार्यालय के नीचे हुआ करेंगे।
स्मार्ट ऑफिस सुविधाओं से लैस यह केंद्र हाई-स्पीड इंटरनेट, पेपरलेस वर्क कल्चर, डिजिटल आर्काइव्स और अत्याधुनिक कॉन्फ्रेंस रूम के साथ प्रशासनिक कामकाज को सरल बनाता है।
नया पता, नई व्यवस्था: सेवा तीर्थ में शिफ्ट हुआ PMO
सेवा तीर्थ परिसर में तीन मुख्य इमारतें बनाई गई हैं। सेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय का मुख्यालय है, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तथा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के कार्यालय स्थापित किए गए हैं। पहले ये सभी विभाग अलग-अलग स्थानों पर कार्यरत थे, जिससे समन्वय में कठिनाई, परिचालन अक्षमताएँ और रखरखाव लागत बढ़ जाती थी। अब एक ही परिसर में सभी प्रमुख कार्यालयों के होने से कार्यप्रणाली अधिक तेज, प्रभावी और सुव्यवस्थित हो सकेगी।
इसके अलावा कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा, संस्कृति, विधि एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण, कृषि एवं किसान कल्याण, रसायन एवं उर्वरक, कॉर्पोरेट कार्य और जनजातीय कार्य मंत्रालय सहित कई अहम मंत्रालयों के कार्यालय स्थापित किए गए हैं। इससे नीति निर्माण और प्रशासनिक फैसलों में तालमेल और गति दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
हाईटेक और पर्यावरण अनुकूल: स्मार्ट ऑफिस की नई पहचान
सेवा तीर्थ को पूरी तरह हाईटेक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। यहाँ हाई-स्पीड इंटरनेट, डिजिटल आर्काइव्स, पेपरलेस वर्क कल्चर को बढ़ावा देने वाली प्रणालियाँ और अत्याधुनिक कॉन्फ्रेंस रूम बनाए गए हैं। परिसर में स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, व्यापक निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया अवसंरचना भी मौजूद है।
इससे अधिकारियों और आगंतुकों के लिए सुरक्षित एवं सुगम वातावरण सुनिश्चित होता है। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इन भवनों को 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है। यहाँ नई ऊर्जा प्रणालियाँ, जल संरक्षण उपाय, प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन और बेहतर संरचनाएँ अपनाई गई हैं, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके।
80 साल की विरासत को विदाई, भविष्य की ओर कदम
साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में आज अंतिम और ऐतिहासिक कैबिनेट बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। इसी भवन में 15 अगस्त 1947 को भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में पहली कैबिनेट बैठक हुई थी।
80 वर्षों तक सत्ता और प्रशासन का केंद्र रहे साउथ ब्लॉक को अब सार्वजनिक उपयोग के लिए संग्रहालय में बदलने की योजना है। नॉर्थ ब्लॉक में ‘युगे युगीन संग्रहालय’ के निर्माण का काम भी शुरू हो चुका है। सेवा तीर्थ में शिफ्ट होने से प्रधानमंत्री के आवागमन को सुगम बनाने के साथ-साथ आम नागरिकों को ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
विजय चौक के पास स्थित यह नया परिसर एक आधुनिक, कुशल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित प्रशासनिक व्यवस्था का प्रतीक बनकर उभरा है, जो आने वाले वर्षों में भारत की गवर्नेंस प्रणाली को नई दिशा देगा।
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