होलिका दहन फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को किया जाता है. पंचांग के अनुसार इस साल होलिका दहन 2 मार्च को होगा. तीन साल बाद फिर होलिका दहन पर भद्रा का साया पड़ने से होलिका दहन के समय को लेकर असमंजस कीस्थिति बनी हुई है. होलिका दहन हमेशा प्रदोष काल में शुभ माना जाता है. शास्त्रों के मुताबिक, होलिका दहन तय समय पर ही करना चाहिए. इस बार होलिका दहन को लेकर तीन मुख्य रुकावटें सामने आ रही हैं. पहला तो भद्रा काल को होलिका दहन में सबसे बड़ी रुकावट माना जाता है.

भद्राकाल के दौरान होलिका दहन करना अशुभ होता है. अगर भद्रा काल की रात हो, तो भद्रा काल खत्म होने के बाद ही दहन उचित होगा. इसके अलावा, इस साल पूर्णिमा की तारीख को लेकर भी असमंजस बना है. इसलिए, होलिका दहन उदया तिथि और प्रदोष काल के सही मेल को ध्यान में रखकर करना चाहिए. तीसरा कारण होलिका दहन के दौरान कुछ अशुभ योग बन सकते हैं, जो पूजा और दहन के समय पर असर डाल रहे हैं. राहु काल या दूसरे अशुभ समय में होलिका दहन नहीं करना चाहिए.

होलिका दहन का समय

शास्त्रों के अनुसार, भद्रा का साया 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट से शुरू होगा और अगले दिन 3 मार्च को सुबह 4 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इसलिए, 2 मार्च को सुबह 12 बजकर 50 मिनट जे से पहले, भद्रा काल में या 3 मार्च की सुबह भद्रा खत्म होने के बाद होलिका दहन करना है। शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में किया जाता है।

होलिका दहन सही समय पर क्यों किया जाता है?

होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह आत्मिक शुद्धि का प्रतीक है। सही समय पर होलिका दहन करने से जीवन से नाकारात्मक, डर और रुकावटें दूर होती हैं। इसलिए 2026 में होलिका दहन करते समय पंचांग देखकर बताए गए रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा करना और भद्रा योग और अशुभ योग से बचना फलदायी होगा।