बांग्लादेश में बीएनपी सरकार बनाने जा रही है और खालिदा जिया के लाल तारिक रहमान नए प्रधान मंत्री बनेंगे. इस बीच अपने सबसे नजदीकी पड़ोसी यानी भारत को लेकर बीएनपी ने रुख साफ करते हुए कहा है कि ‘बांग्लादेश और भारत के रिश्ते मजबूत होंगे’. सुबह पड़ोसी के साथ रिश्ते सुधारने की बात करते शाम को बीएनपी ने वही काम करना शुरू कर दिया है, जो यूनुस को ले डूबा. बीनपी ने बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लौटाने की मांग दोहराई है. एक बार फिर से बांग्लादेश सरकार ने वही पुरानी रट शुरू कर दी है.

क्या बोली तारिक रहमान की पार्टी?

तारिक रहमान की पार्टी के वरिष्ठ नेता और स्थायी समिति के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने कहा है कि ‘भारत को कानून का सम्मान करते हुए हसीना को ढाका वापस भेजना चाहिए ताकि उन पर बांग्लादेश में मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मुकदमा चलाया जा सके’. सलाहुद्दीन अहमद आगे बोले कि ‘हमारी पार्टी औपचारिक रूप से भारत सरकार से उन्हें वापस भेजने का आग्रह करेगी. यह दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच का मामला है और हम इसे कानूनी रूप से आगे बढ़ाएंगे’.

शेख हसीना को सुनाई गई थी मौत की सजा

बता दें कि बांग्लादेश में नवंबर 2025 में ढाका के एक विशेष न्यायाधिकरण ने शेख हसीना को उनकी गैर-मौजूदगी में ‘मौत की सजा’ सुनाई थी, जिसके बाद से ही उनकी वापसी का दबाव भारत पर बढ़ता जा रहा है. बता दें कि प्रत्यर्पण की मांग ऐसे समय में आई है जब 12 फरवरी को शेख हसीना ने दिल्ली से एक बयान जारी कर बांग्लादेश के इन चुनावों को फर्जी करार दिया था और मांग उठाई थी कि इसे रद्द करके पूरी कानूनी प्रक्रिया से दोबारा शुरू किया जाना चाहिए.

भारत का क्या है स्टैंड?

बता दें कि इससे पहले भी शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग उठ चुकी है, जिस पर जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जांच करने की बात करते हुए कहा था कि ‘हम बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों के प्रति प्रतिबद्ध हैं, जिसमें शांति, लोकतंत्र, समावेश और स्थिरता शामिल हैं, और इस संबंध में सभी स्टेकहोलडर्स के साथ बातचीत जारी रखेंगे’.

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