पटना। बिहार विधानसभा के मौजूदा सत्र में इतिहास और सम्मान की गूंज सुनाई दी। अतरी (गया) से विधायक रोमित कुमार ने सदन के माध्यम से केंद्र सरकार से दो महान विभूतियों- ‘पर्वत पुरुष’ दशरथ मांझी और बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (श्रीबाबू) को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने की पुरजोर मांग की है।

​दशरथ मांझी: संकल्प का दूसरा नाम
​विधायक ने दशरथ मांझी के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कभी सत्ता या संसाधनों की भीख नहीं मांगी। महज एक छैनी और हथौड़े के दम पर पहाड़ का सीना चीर देने वाले मांझी का साहस व्यवस्था के खिलाफ एक प्रतीकात्मक चोट थी। उनका व्यक्तित्व बिहार की अटूट ‘जिद’ और ‘जज्बे’ का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्हें सम्मानित करना उपेक्षितों के संघर्ष को सम्मान देना होगा।

​श्रीबाबू: आधुनिक बिहार के निर्माता
​बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के योगदान पर चर्चा करते हुए रोमित कुमार ने कहा कि आजादी के बाद सीमित संसाधनों में श्रीबाबू ने राज्य की प्रशासनिक और औद्योगिक नींव रखी। शिक्षा से लेकर विकास की बुनियादी सोच तक, आधुनिक बिहार के निर्माण में उनकी भूमिका अतुलनीय है। वे एक ऐसे राजनेता थे जिन्होंने भविष्य के समृद्ध बिहार का सपना देखा और उसे धरातल पर उतारा।

​न्याय की मांग और राजनीतिक संकेत

​विधायक ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि इन दोनों नामों के लिए केंद्र को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाए। सदन में उठी यह मांग सिर्फ भावनात्मक नहीं है, बल्कि बिहार की अस्मिता और गौरव से जुड़ी है। जानकारों का मानना है कि इस पहल के जरिए युवाओं को यह संदेश देने की कोशिश है कि राष्ट्र निर्माण और निस्वार्थ संघर्ष को इतिहास कभी नहीं भूलता।