लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है. सत्र के पांचवे दिन सदन में जगद्गुरु शंकराचार्य जी का विषय गूंजा. जिसमें मौनी अमावस्या के दिन हुई घटना को लेकर सीएम ने अपने मत रखा. योगी ने कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता, हर पीठ के आचार्य के रूप में जाकर जहां-तहां वातावरण खराब नहीं कर सकता, कोई व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता, हम भारत की संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े हुए लोग हैं और मेरा मानना है भारत के हर नागरिक को कानून को मानना चाहिए.

योगी ने कहा कि ‘क्या हर व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर प्रदेश के अंदर घूम जाएगा? कोई भी मंत्री का बोर्ड लगाकर घूम जाएगा? कोई भी समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर घूम जाएगा? एक सिस्टम है एक व्यवस्था है. भारत के सनातन धर्म की भी यही व्यवस्थाएं हैं. शंकराचार्य का पद सनातन धर्म में सर्वोच्च और सम्मानित पद माना जाता है, बहुत पवित्र माना जाता है. सदन की परंपरा आप देखते होंगे, परंपरा से और नियमों से संचालित होता है. माघ मेला है, मौनी अमावस्या के दिन साढ़े चार करोड़ श्रद्धालु आया है, सबके लिए एक व्यवस्था बनाई गई है और कानून तो सबके लिए बराबर होता है. मेरे लिए कोई अलग कानून नहीं है, अगर मैं अपराध करूंगा तो उसी कानून से मैं भी देखा जाऊंगा जिस कानून से कॉमन मैन देखा जाएगा. मुख्यमंत्री का पद किसी कानून से ऊपर नहीं हो सकता, कोई व्यक्ति कानून व्यवस्था से ऊपर नहीं हो सकता. हम भारत के संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े हुए लोग हैं. मेरा मानना है कि भारत के हर नागरिक को भारत के इस कानून को मानना चाहिए.’

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भारत में शंकराचार्य की पवित्र परंपरा, चार पीठ- योगी

योगी ने आगे कहा कि ‘भारत के अंदर शंकराचार्य की पवित्र परंपरा है. जगद्गुरु शंकराचार्य ने देश के अंदर चार कोनों में चार मठों की स्थापना की. उत्तर में ज्योतिष्पीठ की स्थापना, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और पश्चिम में द्वारिका पुरी. चार पीठों के चार वेद हैं. ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद. इन सबके अपने मंत्र हैं. ऋग्वेद- इसका मंत्र ‘प्रज्ञानं ब्रह्म’ है. यानी प्रज्ञा ही ब्रह्म है. ये इसका मंत्र है. क्योंकि बुद्धि की पवित्रता पर ऋग्वेद ध्यान देता है. यजुर्वेद- ‘अहं ब्रह्मास्मि’… ये इसका मंत्र है. मैं ही ब्रह्म हूं. कोई भी साधक जब अपनी साधना की पराकाष्ठा पर पहुंचता है तब उसे इसकी अनुभूति होती है. यही उपनिषदों का उद्घोष भी है. सामवेद- ‘तत्वमसि’… यानी उस आत्म के बारे में, तू ही वह है, यानी जिसकों तू बाहर ढूंढ रहा है वो तुझमें ही है. अथर्ववेद- ‘अयात्मा ब्रह्म’ आत्मा ही ब्रह्म है. ये इसका मंत्र हैं.’

हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता- योगी

योगी ने आगे कहा कि ‘आदि जगद्गुरु शंकराचार्य ने अनिवार्य किया है जिस पीठ के लिए जो योग्य पात्र होगा उसका मन उसका भाष्य, आज की भाषा में आप कह सकते हैं थीसिस, वह विद्वत परिषद द्वारा अप्रुव्ड होनी चाहिए. फिर उस परंपरा के द्वारा उसको मान्य किया गया हो. हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता, हर पीठ के आचार्य के रूप में जाकर जहां-तहां वातावरण खराब नहीं कर सकता, उन मर्यादाओं का पालन सबको करना होगा.’

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आप लोगों ने क्यों लाठीचार्ज किया था- योगी

योगी ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘अगर वो शंकराचार्य (स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद) थे तो क्यों आप लोगों ने लाठीचार्ज किया था वाराणसी में? क्यों एफआईआर लॉज किया था? आप मर्यादा की बात करते हैं? साढ़े चार करोड़ श्रद्धालु जहां पर आए हों वहां पर जो एग्जिट गेट है जहां से श्रद्धालु बाहर निकल रहे थे, उस मार्ग से किसी को बाहर निकलने का कोई वो नहीं. क्योंकि कोई अंदर जाने का प्रयास करता है तो वो नए भगदड़ को जन्म देता है. श्रद्धालुओं के जीवन के साथ खिलवाड़ करता है. एक जिम्मेदार और मर्यादित व्यक्ति इस प्रकार का आचरण कभी नहीं कर सकता. सपा के लोग पूछें. लेकिन हम लोग मर्यादित लोग हैं, कानून का शासन पर विश्वास करते हैं. कानून का शासन पालन करना भी जानते हैं और पालन करवाना भी जानते हैं. दोनों चीजों का पालन करना जानते हैं. लेकिन इसके नाम पर गुमराह करना बंद कीजिए आप लोग.’