चंडीगढ़। हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त पशु चिकित्सकों की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि 1 जुलाई 2011 से पहले रिटायर डॉक्टर पेंशन में नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस (एनपीए) शामिल कराने के हकदार नहीं हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी वित्तीय लाभ के लिए निर्धारित कट-ऑफ तिथि को केवल इस आधार पर मनमाना नहीं कहा जा सकता कि उससे पहले सेवानिवृत्त कर्मचारी बाहर रह गए।

जस्टिस नमित कुमार ने मेजर डॉ. भूपिंदर सिंह समेत पंजाब पशुपालन विभाग के कई सेवानिवृत्त पशु चिकित्सकों की याचिकाओं का निस्तारण करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता वर्ष 1988 से 2009 के बीच सेवानिवृत्त हुए थे। याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार को

निर्देश देने की मांग की थी कि 1 जुलाई 2011 से उनकी पेंशन में एनपीए जोड़ा जाए और बकाया राशि 18% दंडात्मक ब्याज सहित दी जाए। याचिकाकर्ताओं ने यह दलील दी कि चिकित्सकों (मेडिकल डॉक्टर्स) को समान लाभ पूर्व प्रभाव से दिया गया था, इसलिए पशु चिकित्सकों को भी समानता के आधार पर यह लाभ मिलना चाहिए।

सरकार ने दलील दी कि 20 मई 2011 की अधिसूचना में स्पष्ट निर्देश है कि 1 जुलाई 2011 से प्रभावी होंगे। चूंकि सभी याचिकाकर्ता इससे पहले सेवानिवृत्त हो चुके थे इसलिए वे अपने सेवानिवृत्ति समय लागू नियमों से शासित होंगे। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने दोहराया कि कट-ऑफ तिथि से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारी बाद में लागू योजना या वित्तीय लाभ का दावा नहीं कर सकते।