प्रदीप मालवीय, उज्जैन। सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य करने के फैसले पर विरोध शुरू हो गया है। उज्जैन के इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कहा है कि मजहबी आजादी के खिलाफ कोई भी फैसला मंजूर नहीं है। उन्होंने अपील की है कि जहां इसे अनिवार्य किया है, वहां से बच्चों को निकालें।

उज्जैन के इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने एक बयान में कहा कि हमारा मुल्क जम्हूरी मुल्क है, लोकतांत्रिक मुल्क है और यहां पर सब धर्मों के लोगों को अपने मजहब पर प्रैक्टिस की पूरी आजादी है। उन्होंने कहा कि हमारा इस्लाम हमें यह सिखाता है कि एक खुदा के अलावा किसी की पूजा नहीं कर सकते। लिहाजा हम न किसी और इंसान को मान सकते हैं, न किसी देवी-देवताओं को मान सकते हैं।

किसी और खुदा को शामिल नहीं कर सकते

उन्होंने कहा कि हम किसी जमीन, चाहे वह हिंदुस्तान की भूमि क्यों न हो या मक्का-मदीना की भूमि क्यों न हो, उसको पूजा में नहीं ला सकते। हमारा मजहब इस्लाम है और वह हमें एकेश्वरवाद, यानी एक खुदा को मानने की तालीम देता है। लिहाजा हम किसी और को खुदा में शामिल नहीं कर सकते। ऐसा करना हमारे लिए सबसे बड़ा गुनाह है, शिर्के अजीम है और गुनाह-ए-कबीरा है। इस्लाम इसी पर आधारित है।

पूजा में शामिल होने पर इस्लाम से बाहर हो जाता है मुसलमान

मुफ्ती नासिर अली नदवी ने कहा कि इस्लाम में अगर कोई शख्स मुसलमान रहते हुए किसी और को कबूल करता है या पूजा में शामिल करता है तो वह इस्लाम से फौरन बाहर हो जाता है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अगर किसी भी शैक्षणिक संस्था, धारा या डिपार्टमेंट में गवर्नमेंट कंपलसरी करती है कि वंदेमातरम कहना होगा, यानी धरती की पूजा करनी होगी, तो ऐसी जगहों पर हम अपने बच्चों को और न किसी और को अनुमति देंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अलग संस्था बनाने पर भी विचार किया जा सकता है।

कानून एक हो सकता है, धर्म नहीं

उन्होंने हुकूमत से अनुरोध किया कि वह अपने इस फैसले को वापस ले। उन्होंने कहा कि यह मजहबी आजादी के खिलाफ है और हिंदुस्तान के कानून के भी सरासर खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए एक हो सकता है, लेकिन धर्म कभी भी सबके लिए एक नहीं हो सकता। धर्मनिरपेक्षता का मतलब यह है कि किसी पर जबरदस्ती न की जाए कि वह एक से ज्यादा को कबूल करे।

मुसलमानों को धरती पूजा में शामिल करना अनिवार्य नहीं कर सकते

उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में मुसलमान शुरू से रहते आए हैं और यहां अलग-अलग समुदायों की अपनी-अपनी मजहबी आजादियां हैं। कानून मुसलमानों को एक खुदा को मानने की मजहबी आजादी देता है, लिहाजा उन्हें यह कंपलसरी नहीं किया जा सकता कि वे धरती को भी पूजा में शामिल करें।

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