पपीता एक ऐसा फल है जो बहुत ज़्यादा लोगो को उतना पसंद नहीं आता है. क्योंकि कई बार ये बिल्कुल बेस्वाद निकल जाता है और इसीलिए लोग इसे लेने से पीछे हटते हैं. सच कहें तो ये एक बेहद गुणकारी फल है. आयुर्वेद में इसे अमृतफल इसलिए कहा गया है, क्योंकि यह शरीर को भीतर से संतुलित और मजबूत बनाने में मदद करता है. आइए इसके प्रमुख लाभों को जानते हैं, और फिर उसके बाद आप भी इसे खाने के लिए जरूर राजी हो जाएँगे.

पाचन शक्ति को बढ़ाता है
पपीते में पपेन (Papain) नामक एंजाइम पाया जाता है, जो भोजन को जल्दी पचाने में मदद करता है. यह कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं में लाभकारी है.
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं, जो शरीर को संक्रमण और मौसमी बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं.
बुखार और प्लेटलेट्स में सहायक
डेंगू जैसे बुखार में पपीते की पत्तियों का रस प्लेटलेट्स बढ़ाने में सहायक माना जाता है. हालांकि इसका सेवन चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए.
रक्त शुद्धि में सहायक
पपीता शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे खून साफ होता है और त्वचा में निखार आता है.
त्वचा और बालों के लिए लाभकारी
पपीता त्वचा को हाइड्रेट करता है, दाग-धब्बे कम करता है और बालों की जड़ों को पोषण देता है.
तीनों दोषों का संतुलन
आयुर्वेद के अनुसार पपीता वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में सहायक होता है, विशेषकर जब इसे संतुलित मात्रा में सेवन किया जाए.
सेवन का सही तरीका
- सुबह खाली पेट पका हुआ पपीता खाना अधिक लाभकारी माना जाता है.
- अधिक मात्रा में सेवन से बचें, क्योंकि अधिक पपीता खाने से दस्त या पेट दर्द हो सकता है.
- गर्भवती महिलाओं को कच्चा पपीता नहीं खाना चाहिए.
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