स्मोकिंग केवल फेफड़ों तक सीमित नुकसान नहीं करती, बल्कि यह पूरे शरीर यहाँ तक कि मुंह, दांत और मसूड़ों पर भी गहरा प्रभाव डालती है. कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रमुख कारणों में से एक धूम्रपान है. खासतौर पर अगर कोई व्यक्ति सोने से पहले स्मोकिंग करता है, तो इसका असर दांतों पर और भी ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है. आइए विस्तार से जानते हैं कि सोने से पहले स्मोकिंग करने का दांतों पर क्या प्रभाव पड़ता है.

दांतों का पीला पड़ना

सिगरेट में मौजूद निकोटिन और टार दांतों की ऊपरी सतह (एनामेल) पर जम जाते हैं. रात में ब्रश करने के बाद स्मोकिंग करने से यह पदार्थ पूरी रात दांतों पर चिपके रहते हैं. धीरे-धीरे दांत पीले या भूरे हो जाते हैं.

मसूड़ों की बीमारी

सोने से पहले स्मोकिंग करने से मुंह में लार (saliva) का उत्पादन कम हो जाता है. लार की कमी से बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं. इससे मसूड़ों में सूजन, खून आना और संक्रमण की समस्या बढ़ती है. लंबे समय तक ऐसा रहने पर यह पीरियोडोंटाइटिस जैसी गंभीर मसूड़ों की बीमारी का कारण बन सकता है.

मुंह की दुर्गंध

रात के समय मुंह स्वाभाविक रूप से सूखा रहता है. अगर सोने से पहले स्मोकिंग की जाए तोबैक्टीरिया अधिक सक्रिय हो जाते हैं सुबह तेज बदबू (मॉर्निंग ब्रीथ) आती है.

दांतों में सड़न

धूम्रपान दांतों की सुरक्षा परत को कमजोर करता है, बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है. इससे कैविटी बनने की संभावना बढ़ जाती है.

मुंह के कैंसर का खतरा

लंबे समय तक धूम्रपान करने से मुंह, जीभ, गले और होंठों में कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है. विशेष रूप से ओरल कैंसरका जोखिम स्मोकर्स में कई गुना ज्यादा पाया गया है.

दांतों के उपचार में देरी

यदि आप दांत निकलवाते हैं या कोई डेंटल सर्जरी कराते हैं स्मोकिंग घाव भरने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है. संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.

सोने से पहले स्मोकिंग क्यों ज्यादा नुकसानदायक है?

रात में लार का स्तर कम होता है और मुंह की सफाई नहीं हो पाती, तंबाकू के रसायन लंबे समय तक दांतों और मसूड़ों पर रहते हैं. इसलिए सोने से पहले स्मोकिंग करने से नुकसान कई गुना बढ़ जाता है.

क्या करें?

  1. सोने से पहले स्मोकिंग बिल्कुल न करें.
  2. दिन में दो बार ब्रश करें.
  3. फ्लॉस का उपयोग करें.
  4. नियमित डेंटल चेकअप कराएं.
  5. धीरे-धीरे स्मोकिंग छोड़ने की योजना बनाएं.