भुवनेश्वर : श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार पर हाई-लेवल मीटिंग आज खत्म हुई, जिसमें मंदिर के खजाने की इन्वेंट्री और वैल्यूएशन (गणति-मानति) के बारे में ज़रूरी फैसले लिए गए। मीटिंग की अध्यक्षता ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भुवनेश्वर के लोक सेवा भवन में की।
ऑफिशियल सूत्रों के मुताबिक, रत्न भंडार में रखे गहनों की गिनती, वेरिफिकेशन और वैल्यूएशन के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का डिटेल में रिव्यू किया गया। उम्मीद है कि सरकार SOP को ऑफिशियली मंज़ूरी देगी, जिससे लंबे समय से इंतज़ार किया जा रहा इन्वेंट्री प्रोसेस जल्द ही शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
मीटिंग में राज्य के कानून मंत्री, चीफ सेक्रेटरी और श्री जगन्नाथ मंदिर एडमिनिस्ट्रेशन (SJTA) के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर समेत सीनियर अधिकारी शामिल हुए। चर्चा ट्रांसपेरेंसी, सिक्योरिटी इंतज़ाम, डॉक्यूमेंटेशन प्रोटोकॉल और कोर्ट के निर्देशों का पालन पक्का करने पर फोकस रही।

सूत्रों ने बताया कि एडमिनिस्ट्रेटिव फॉर्मैलिटी पूरी होने के बाद इन्वेंट्री प्रोसेस की तारीख जल्द ही फाइनल कर दी जाएगी।
यह कदम उड़ीसा हाई कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों के मुताबिक है, जिसमें राज्य सरकार को तय समय में कीमती सामान की इन्वेंट्री और वेरिफिकेशन पूरा करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि रत्न भंडार की गुम हुई चाबियों की जांच से जुड़े मामले राज्य विधानसभा के सामने रखे जाएं।
रत्न भंडार, जो भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों के सदियों पुराने गहनों और कीमती सामान को संभालकर रखता है, उसका बहुत धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है। राज्य सरकार ने मंदिर की विरासत की सुरक्षा पक्का करते हुए, इस प्रोसेस को सुरक्षित, पारदर्शी और समय पर पूरा करने का अपना वादा दोहराया। आने वाले दिनों में शुरू होने के शेड्यूल के बारे में और ऑफिशियल घोषणाएं होने की उम्मीद है।
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