चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने रिटायर्ड कर्मियों और पेंशनरों की पुरानी पेंशन योजना की मांग को गंभीरता से लिया है। सीएम कार्यालय ने पुराने वेतनमान, पेंशन और भत्ते बहाली मोर्चे के साथ उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। बैठक 5 मार्च दोपहर 12 बजे सीएम निवास सेक्टर-2 चंडीगढ़ में होगी। इसको लेकर लिखित पत्र जारी किया गया है। पत्र से हजारों प्रभावित पेंशनभोगियों में नई उम्मीद जगी है। क्योंकि यह मांग 2004 से लंबित है।

ओल्ड स्केल, पेंशन एंड अलाउंस री-स्टोरेशन फ्रंट के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा

बैठक में ओल्ड स्केल, पेंशन एंड अलाउंस री-स्टोरेशन फ्रंट के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा होगी। बैठक में अधिकतम 5 सदस्यों को आमंत्रित किया गया है। संगरूर के उपायुक्त को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह कार्यालय से एक राजपत्रित अधिकारी को कार्यवाहक बनाकर प्रतिनिधिमंडल को बैठक स्थल तक सुनिश्चित करें। 2022 में आप कैबिनेट ने 1.75 लाख कर्मियों के लिए योजना को मंजूरी दी थी, जिसमें सरकार प्रति वर्ष 1,000 करोड़ का पेंशन कोष में योगदान करने को तैयार हुई, पर पुराने वेतन स्केल और भत्तों की बहाली अभी अधर में है।

पुरानी पेंशन बहाली की मांग सरकारी कर्मियों, शिक्षकों और पेंशनर्स के लिए जीवन-मरण का सवाल है। पुरानी व्यवस्था में अंतिम वेतन का 50% गारंटेड पेंशन मिलती थी। संगठन लंबे आंदोलनों के बाद अब उच्च स्तरीय बातचीत के दौर में है। अगर बहाली हुई तो मासिक पेंशन में 20-30% तक इजाफा संभव है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य बजट पर 14000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, पर सरकार कर्मचारी हितों को प्राथमिकता दे रही है। पुरानी पेंशन डिफाइंड बेनीफिट यानी तय लाभ योजना है। इसका असर यह है कि भविष्य में सरकार के पास अन्य विकास, शिक्षा, सेहत खर्च के लिए कम संसाधन बचे रह सकते हैं। पुरानी पेंशन को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी मामला चला है। कोर्ट ने पंजाब को कई बार पेंशन लागू करने के लिए कहा और अधिकारियों को जवाब भी देने को कहा है। अगर पुरानी पेंशन लागू होती है तो सरकारी कर्मियों को रिटायरमेंट के बाद अंतिम वेतन के हिसाब से ज्यादा पेंशन मिल सकती है, जो एनपीएस से बेहतर माना जाता है।