कुंदन कुमार, पटना। बिहार के 13 विश्वविद्यालय के कॉलेज में में कार्यरत करीब 24 से 25 सौ अतिथि शिक्षक नियमित करने की मांग को लेकर ये लोग धरने पर हैं. इन लोग की मुख्य मांग है. हम लोग को जो अतिथि शिक्षक कहा जाता है और इसे अंग्रेजी में गेस्ट फैकेल्टी कहते हैं. इसमें अतिथि शब्द हटाया जाए और हम लोग को नियमित 65 वर्षों के लिए किया जाए.
धरना दे रहे शिक्षकों के मुताबिक अतिथि शिक्षकों का चयन 2018 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदेश से किया गया था. कई लोग 2018 में बहाल हुए तो कुछ 2019 में तो कुछ 2020 में बहाल हुए. राज्य के सभी कॉलेजों में अतिथि शिक्षक हैं और पूरे बिहार में अतिथि शिक्षक संख्या 2400 से 2500 के बीच है. बताया गया है कि इन लोग की सैलरी क्लास करने पर मिलती है. एक क्लास का 1500 रुपये इन्हें दिया जाता है. पूरे महीने में एवरेज 34 क्लास का रखा गया है. 34 क्लास करने पर इन्हें 50000 मिलते हैं. अगर 34 क्लास से ज्यादा भी हो जाएगा तो उन्हें 50000 से अधिक नहीं मिलने का प्रावधान है.
अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और भागलपुर तिलकामांझी कॉलेज में कार्यरत आनन्द आजाद ने बताया कि, हम सभी अतिथि शिक्षक करीब 7 से 8 साल से काम कर रहे हैं. उस वक्त जो 1500 रुपये प्रति क्लास निर्धारित किया गया था वही आज भी है. अगर 34 क्लास से काम करेंगे तो 1500 प्रति क्लास की दर काट दिया जाता है.
उन्होंने कहा कि, पूरे बिहार में 13 विश्वविद्यालय हैं. इसमें करीब 7 से 8 हजार नियमित प्रोफेसर है जो 65 वर्षों के लिए है. वह पढ़ाई कराएं या ना कराएं उनकी सैलरी मिलती है.धरना देने के लिए आये है, तो छुट्टी लेकर आए हैं. आज क्लास नहीं किए हैं तो हम लोग की को पैसे नहीं मिलेंगे. गर्मी की छुट्टी होती है तो एक महीने हम लोग को पैसे नहीं मिलते हैं. हमारे बीवी-बच्चे भूखे रहते हैं.
कॉलेज में लंबी छुट्टी हुई तो हम लोग के लिए आफत हो जाती है. जबकि पड़ोसी राज्य झारखंड में भी कॉलेज में अतिथि शिक्षक हैं. परंतु उन लोगों को गर्मी की छुट्टी का एवरेज जैसे यहां 50000 है उसी तरह वहां भी एवरेज राशि मिलती है. सबसे बड़ी बात है कि यहां हम लोग को हर 11 महीने पर रिन्युअल (सेवा का नवीनीकरण ) किया जाता है.
अगर विद्यालय के कुलपति नहीं चाहेंगे तो हम लोग घर पर बैठ जाएंगे. इसी वर्ष मुंगेर में दो अतिथि शिक्षक को कुलपति रिन्युअल नहीं किया गया, जबकि झारखंड में सेवा का नवीनीकरण का सिस्टम नहीं है. वहां अतिथि शिक्षक रेगुलर क्लास लेते आ रहे हैं. लेकिन हम लोग को हर 11 महीने पर तलवार लटक जाती है और डर बना रहता है कि कहीं कुलपति नाराज ना हो जाए. अगर वह नाराज हुए तो हम लोग बेरोजगार हो जाएंगे. अधिकांश अतिथि शिक्षकों की उम्र 50 वर्ष से ऊपर हो चुकी है, ऐसे में अगर हमारी मांगे नहीं मानी गई तो हम लोग भूखे रहने के कगार पर आ जाएंगे.
अतिथि शिक्षकों ने कहा कि, इसी महीने 4 फरवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा घोषणा किया कि राज्य के 213 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे. हम जानना चाहते हैं कि बच्चों को पढ़ने के लिए शिक्षक कहां से लाएंगे. इस तरह अतिथि शिक्षकों का शोषण करके वह डिग्री कॉलेज कैसे चलाएंगे. इसलिए सरकार से मेरी मांग है कि पहले हम लोग को नियमित करें.
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