रायपुर। बलरामपुर जिले के हंसपुर गांव में प्रशासनिक टीम की कथित पिटाई से एक आदिवासी ग्रामीण की मौत और अन्य के घायल होने के मामले में सियासत गरमा गई है. छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस घटना को ‘प्रशासनिक बर्बरता’ करार देते हुए सरकार और अधिकारियों पर तीखा हमला बोला है.

“अधिकारी बने गुंडे, बर्दाश्त नहीं होगा”

नेता प्रतिपक्ष डॉ. महंत ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों के साथ की गई मारपीट और उसके बाद हुई मौत विचलित करने वाली है. उन्होंने इसे ‘प्रशासनिक गुंडागर्दी’ बताते हुए कहा, “लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की रक्षा करने वाले ही जब भक्षक बन जाएं, तो यह बर्दाश्त के बाहर है. अधिकारियों का यह कृत्य किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है.”

डॉ. महंत की सरकार से प्रमुख मांगें:

  • उच्चस्तरीय जांच: पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए.
  • सख्त कार्रवाई: जो भी अधिकारी इस जघन्य घटना के लिए जिम्मेदार है, उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई (FIR) हो.
  • मुआवजा: मृतक के परिजनों को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए.
  • इलाज की व्यवस्था: घटना में घायल हुए अन्य ग्रामीणों के बेहतर इलाज की पूरी जिम्मेदारी सरकार उठाए.

“न्याय मिलने तक लड़ेंगे लड़ाई”

डॉ. महंत ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस दुख की घड़ी में पीड़ित आदिवासी परिवारों के साथ खड़ी है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला, तो कांग्रेस सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ेगी. उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया कि आखिर ऐसी क्या नौबत आई कि जांच के नाम पर ग्रामीणों को लाठी-डंडों से पीटा गया?

गौरतलब है कि कुसमी क्षेत्र में अवैध उत्खनन की जांच करने गई प्रशासनिक टीम पर ग्रामीणों के साथ मारपीट का आरोप लगा है, जिसमें एक बुजुर्ग की जान चली गई. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है.