दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने ‘फांसी घर’ मामले में बड़ा फैसला लिया है। समिति ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल(Arvind Kejriwal), पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया(Manish Sisodiya), पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल (Ram Niwas Goyal) और राखी बिरला (Rakhi BIrla)को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष रखने का आखिरी मौका देने का निर्णय लिया है। समिति ने इसके लिए 6 मार्च 2026 की तारीख तय की है।
दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति की सोमवार को हुई बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। बैठक में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल और राखी बिरला द्वारा दिए गए लिखित जवाबों पर विचार किया गया। बताया गया कि चारों नेताओं ने अपने जवाब में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कुछ दिनों की मोहलत मांगी थी, ताकि वे अपना पक्ष विस्तार से रख सकें। इस पर विचार करने के बाद समिति ने उन्हें आखिरी मौका देने का निर्णय लिया।
नेताओं ने मांगा था समय
विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह राजपूत ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने लिखित जवाब में 2, 3, 4, 5 या 6 मार्च में से किसी भी दिन पेश होने का समय मांगा था। इसी तरह, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल और पूर्व उपाध्यक्ष राखी बिरला ने भी व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कुछ दिनों की मोहलत मांगी थी। अध्यक्ष के अनुसार, समिति ने इन अनुरोधों को स्वीकार करते हुए जांच प्रक्रिया में और देरी न हो, इसके लिए 6 मार्च 2026 की अंतिम तिथि तय कर दी है। इस दिन सभी संबंधित नेताओं को समिति के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा।
विजेंद्र गुप्ता ने उठाया था मामला
यह मामला मूल रूप से विजेंद्र गुप्ता द्वारा उठाया गया था। उन्होंने 9 अगस्त 2022 को दिल्ली विधानसभा परिसर के भीतर उद्घाटन किए गए कथित ‘फांसी घर’ की प्रमाणिकता पर सवाल खड़े किए थे। बताया जाता है कि इस ढांचे के निर्माण और उसकी वैधता को लेकर विवाद शुरू हुआ, जिसके बाद मामला विशेषाधिकार समिति के पास पहुंचा। अब इसी प्रकरण में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं से जवाब मांगा गया है।
समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुए AAP नेता
विशेषाधिकार समिति को ‘फांसी घर’ के उद्घाटन से जुड़ी परिस्थितियों का तथ्यात्मक और प्रक्रियात्मक मूल्यांकन कर मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया था। इस संबंध में संबंधित नेताओं को कई बार समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया, लेकिन वे पहले दिए गए अवसरों पर पेश नहीं हुए। समिति में अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह राजपूत के अलावा सूर्य प्रकाश खत्री, अभय कुमार वर्मा, अजय कुमार महावर, सतीश उपाध्याय, नीरज बसोया, रवि कांत, राम सिंह नेताजी और सुरेंद्र कुमार शामिल हैं। समिति ने पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत अखंडता सुनिश्चित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, यह भी कहा गया कि निष्पक्ष और व्यापक जांच पूरी करने के लिए संबंधित सभी व्यक्तियों का सहयोग अनिवार्य है।
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