कुंदन कुमार/ पटना। बजट सत्र के 11वें दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भारी हंगामा हुआ। चिराग पासवान की पार्टी (LJP-R) और जदयू ने राजद विधायक कुमार सर्वजीत द्वारा दिवंगत नेता रामविलास पासवान के लिए ‘बेचारा’ शब्द के इस्तेमाल पर कड़ा ऐतराज जताया। मंगलवार को चिराग के विधायकों ने विधानसभा परिसर में ‘राजद की पहचान, दलितों का अपमान’ के नारों के साथ प्रदर्शन किया।

​विवाद की जड़: क्या है ‘बेचारा’ का पूरा मामला?

11 फरवरी को बजट चर्चा के दौरान राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा था, आज बेचारे रामविलास पासवान जी जिंदा होते तो दलितों के हालात ऐसे नहीं होते। उन्होंने विधानसभा परिसर में पासवान जी की मूर्ति लगाने की भी मांग की थी। हालांकि, LJP-R ने इसे अपमान मानकर मोर्चा खोल दिया।

​सर्वजीत की सफाई और जातिगत पलटवार

विवाद बढ़ता देख कुमार सर्वजीत ने माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने दलील दी कि ‘बेचारा’ कोई गाली नहीं, बल्कि एक भावुक शब्द है जो किसी महान व्यक्ति के जाने के बाद सम्मान में कहा जाता है। उन्होंने LJP-R विधायक राजू तिवारी पर निशाना साधते हुए इसे जातिगत रंग दिया और कहा कि कुछ लोगों को दलित के बेटे का कद पच नहीं रहा है।

​सदन में तीखी नोकझोंक

सोमवार को सदन के दूसरे सत्र में माहौल तब गरमा गया जब राजू तिवारी ने विपक्ष के संस्कारों पर सवाल उठाए। इसके जवाब में सर्वजीत ने 12 जनपथ (पासवान का बंगला) खाली कराए जाने और मूर्ति हटाए जाने की याद दिलाते हुए सत्ता पक्ष को घेरा। दूसरी ओर, राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इसे तूल दे रहा है।