दिल्ली नगर निगम (MCD) ने प्रदूषण कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की। निगम ने कहा कि सीएनजी और इलेक्ट्रिक माध्यम से होने वाले दाह संस्कार अब निशुल्क किए जाएंगे। यह सुविधा पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दो साल के लिए लागू की जाएगी। एमसीडी ने इस पहल से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।
एमसीडी के प्रस्ताव के मुताबिक, साल 2023-25 के बीच दिल्ली में केवल 8 से 9 प्रतिशत शवों का ही सीएनजी और इलेक्ट्रिक माध्यम से दाह संस्कार हुआ था। आंकड़ों में इस कमी को देखते हुए नगर निगम ने यह फैसला लिया है। यह पहल दो साल के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की जा रही है। इस पर सालाना अनुमानित 2 से 2.5 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान लगाया गया है।
MCD के अंतर्गत इतने शमशान घाट
एमसीडी वर्तमान में दिल्ली में लकड़ी से चलने वाले 59 श्मशान घाट, सीएनजी आधारित 9 श्मशान और बिजली से चलने वाला 1 श्मशान घाट चला रही है। सीएनजी श्मशान: प्रति शव 1,500 रुपये, बिजली श्मशान: प्रति शव 500 रुपये नगर निगम ने अब सीएनजी और इलेक्ट्रिक माध्यम से होने वाले दाह संस्कार को दो साल के पायलट प्रोजेक्ट के तहत निशुल्क कर दिया है, जिससे नागरिकों पर आर्थिक बोझ कम होगा और पर्यावरण को लाभ मिलेगा।
सफल रहा प्रोजेक्ट तो बढ़ेगा आर्थिक बोझ
एमसीडी के अनुसार, अधिकांश परिवार शव का दाह संस्कार लकड़ी से करवाते हैं, जिससे दिल्ली के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर नकारात्मक असर पड़ता है। अधिकारियों का कहना है कि लकड़ी से दाह संस्कार करने पर करीब 6,000 रुपये खर्च होते हैं। एमसीडी के पायलट प्रोजेक्ट के तहत अगर अगले दो साल में सीएनजी और इलेक्ट्रिक दाह संस्कार में भागीदारी बढ़ती है, तो इसका आर्थिक बोझ बढ़ना तय है। अधिकारियों के अनुसार, अगर इसका आंकड़ा 25% तक पहुंचा, तो एमसीडी पर हर महीने 10 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। दिल्ली में एमसीडी के अलावा अन्य संस्थाएं भी श्मशान घाट चलाती हैं, जहाँ भी दाह संस्कार लकड़ी से ही होता है। ये संस्थाएं आम तौर पर ‘नो लॉस नो प्रॉफिट’ के आधार पर संचालित होती हैं।
क्या है MCD का राय
एमसीडी का कहना है कि लकड़ी जलने से निकलने वाला धुआं दिल्ली के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को प्रभावित करता है। इस संदर्भ में हाल ही में एमसीडी कमिश्नर की अध्यक्षता में अधिकारियों की मीटिंग हुई, जिसमें सीएनजी और इलेक्ट्रिक माध्यम से दाह संस्कार करवाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने पर चर्चा की गई। मीटिंग में अधिकारियों ने बताया कि लकड़ी से दाह संस्कार करने पर लगभग 6,000 रुपये का खर्च आता है, जबकि सीएनजी से यह खर्च केवल 1,500 रुपये है। इस पहल से प्रदूषण कम होने के साथ ही लोगों का खर्च भी घटेगा।
MCD पर बढ़ेगा बोझ
एमसीडी के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023, 2024 और 2025 में दिल्ली में केवल 8-9% शवों का दाह संस्कार सीएनजी और इलेक्ट्रिक माध्यम से हुआ था। इस कम संख्या के चलते, एमसीडी पर सालाना लगभग 2 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार था। अब जब सीएनजी और इलेक्ट्रिक माध्यम से दाह संस्कार फ्री कर दिए गए हैं, तो अगर इसका आंकड़ा अगले दो साल में 25% तक पहुंच जाता है, तो एमसीडी पर हर महीने लगभग 10 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक


