Phulera Dooj 2026: कब है फुलेरा दूज? इस दिन क्यों खेली जाती है फूलों की होली?
Phulera Dooj 2026: कब है फुलेरा दूज? इस दिन क्यों खेली जाती है फूलों की होली?
19 फरवरी को मनाई जाने वाली फुलेरा दूज को प्रेम और भक्ति का सबसे पावन दिन माना जाता है.
19 फरवरी को मनाई जाने वाली फुलेरा दूज को प्रेम और भक्ति का सबसे पावन दिन माना जाता है.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि रंगों के गुलाल से पहले फूलों की होली खेलने की परंपरा क्यों शुरू हुई?
लेकिन क्या आप जानते हैं कि रंगों के गुलाल से पहले फूलों की होली खेलने की परंपरा क्यों शुरू हुई?
फूल प्रकृति की सबसे शुद्ध और सुंदर रचना माने जाते हैं, जो कोमलता और सुगंध का प्रतीक हैं.
फूल प्रकृति की सबसे शुद्ध और सुंदर रचना माने जाते हैं, जो कोमलता और सुगंध का प्रतीक हैं.
भगवान श्री कृष्ण को फूलों से सजाना और उन पर पुष्प वर्षा करना इस बात का संकेत है कि हम अपने जीवन को भी फूलों की तरह महकता हुआ और दूसरों के लिए सुखद बनाना चाहते हैं.
भगवान श्री कृष्ण को फूलों से सजाना और उन पर पुष्प वर्षा करना इस बात का संकेत है कि हम अपने जीवन को भी फूलों की तरह महकता हुआ और दूसरों के लिए सुखद बनाना चाहते हैं.
रंगों का गुलाल थोड़ा गहरा और चटक होता है, जबकि फूल मन को शांत और स्थिर रखने में मदद करते हैं.
रंगों का गुलाल थोड़ा गहरा और चटक होता है, जबकि फूल मन को शांत और स्थिर रखने में मदद करते हैं.
यही कारण है कि ब्रज के मंदिरों में सबसे पहले फूलों वाली होली खेली जाती है
यही कारण है कि ब्रज के मंदिरों में सबसे पहले फूलों वाली होली खेली जाती है
ताकि भक्त का मन पहले भक्ति की सुगंध से भर जाए और फिर वह रंगों के उत्सव में डूब सके.
ताकि भक्त का मन पहले भक्ति की सुगंध से भर जाए और फिर वह रंगों के उत्सव में डूब सके.
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