हर्षित तिवारी, खातेगांव। “अक्सर शादी के बाद नवदंपति हनीमून पर जाते हैं…लेकिन मध्यप्रदेश के खातेगांव के एक नवविवाहित जोड़े ने कुछ अलग कर दिखाया है। शादी के महज 9 दिन बाद यह जोड़ा निकल पड़ा है 3500 किलोमीटर लंबी पवित्र नर्मदा परिक्रमा पर…वो भी पैदल।

शादी नवंबर 2025 में और सिर्फ 9 दिन बाद जीवनसाथी बने शिवम और रौशनी ने हनीमून नहीं, बल्कि आस्था का मार्ग चुना। देवास जिले के खातेगांव निवासी शिवम यादव और उनकी पत्नी रौशनी यादव इस समय मां नर्मदा की करीब 3500 किलोमीटर लंबी परिक्रमा पदयात्रा पर हैं। अब तक 70 दिनों से ज्यादा की यात्रा पूरी कर चुके इस नवदंपत्ति ने लगभग 1800 किलोमीटर की आधी परिक्रमा पूरी कर ली है।

नवदंपति ने कही ये बात

शिवम ने बताया कि “शादी के बाद लोग घूमने जाते हैं, लेकिन हमारा झुकाव अध्यात्म और सनातन की ओर ज्यादा है। मां नर्मदा के प्रति गहरी आस्था और विश्वास है। मैंने शादी से पहले भी नर्मदा पदयात्रा की है, इसलिए इस बार जीवनसंगिनी के साथ यह संकल्प लिया। रौशनी यादव ने कहा कि “मां नर्मदा के प्रति हमारा अटूट विश्वास है। सनातनी लोगों से शिक्षा और संस्कार मिले हैं। परिवार ने भी पूरा समर्थन दिया है, इसलिए यह यात्रा हमारे लिए तपस्या और सौभाग्य दोनों है।” शिवम के पिता शिक्षक हैं और परिवार का पूरा समर्थन इस धार्मिक यात्रा में साथ है। परिवार ने नवदंपत्ति के इस फैसले को आशीर्वाद दिया और समाज के लिए एक प्रेरणा बताया।

आस्था की मिसाल

मां नर्मदा की परिक्रमा सनातन परंपरा में अत्यंत कठिन और पुण्यदायी मानी जाती है। लगभग 3500 किलोमीटर की यह यात्रा महीनों तक चलती है, जिसमें श्रद्धालु पैदल दोनों तटों की परिक्रमा करते हैं। जहां एक ओर आधुनिकता के दौर में जीवनशैली बदल रही है। वहीं खातेगांव का यह नवदंपति सनातन परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दे रहा है। यह यात्रा केवल पैरों की नहीं…विश्वास, त्याग और समर्पण की भी है।

शादी के कुछ ही दिनों बाद 3500 किलोमीटर की पैदल नर्मदा परिक्रमा पर निकला यह नवदंपति आज युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा बन रहा है। आस्था और अध्यात्म की यह अनोखी मिसाल समाज को यह संदेश दे रही है कि संस्कार और विश्वास आज भी जीवित हैं।

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