“प्रजासुखे सुखम् राज्ञः, प्रजानाम् च हितम् हितम्”कौटिल्य के अर्थशास्त्र से लिया गया यह एक प्रमुख राजधर्म सूत्र है। इसका अर्थ स्पष्ट है कि “प्रजा के सुख में ही राजा का सुख निहित है और प्रजा के हित में ही उसका अपना हित है।” इस श्लोक के आधार पर कहा जा सकता है कि राजा को व्यक्तिगत सुख के बजाय प्रजा की खुशी और कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि प्रजा का कल्याण ही राजा की वास्तविक सफलता है। इस भावना को शब्दशः आत्मसात करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया गया है।

डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में यह बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं बल्कि एक स्पष्ट विकास दर्शन का दस्तावेज है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रतिपादित ‘GYAN’ यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश सरकार ने इसमें ‘I’ for Infrastructure और ‘I’ for Industry जोड़कर  ‘GYANII’ मॉडल का स्वरूप दिया है। यह बदलाव मात्र शब्दों का नहीं बल्कि इससे विकास की दिशा के प्रति राज्य के मुखिया की सोच का भी अंदाज़ा हो रहा है।

GYANII- विकास के छह स्तंभ मॉडलों में G से गरीब कल्याण है जो गरीबों को अंतिम पंक्ति से प्रथम पंक्ति में लाने का लक्ष्य लेकर रखा गया है। इसीलिए इस बजट में सामाजिक सुरक्षा पेंशन, संबल योजना, आवास और खाद्यान्न सुरक्षा जैसी योजनाओं को मजबूती दी गई है। बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) को बजट प्रक्रिया से जोड़ना भी एक अभिनव कदम रहा है। अब गरीबी को केवल उनकी आय से ही नही बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के 12 संकेतकों से भी मापा जाएगा।

GYANII का दूसरा अक्षर Y जो युवा शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। मध्य प्रदेश देश का तीसरा सबसे युवा राज्य है जहां 15 से 29 वर्ष के युवाओं की आबादी 28 प्रतिशत है। बजट में कौशल विकास, स्टार्टअप प्रोत्साहन और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। औद्योगिक निवेश और श्रम कल्याण के लिए 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान राज्य के युवाओं को रोजगार देने की दिशा में बड़ा कदम है।

GYANII का तीसरा अक्षर A है राज्य के अन्नदाता के लिए और वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” घोषित किया गया है। इस बजट में कृषि उत्पादन, उत्पादकता वृद्धि और उपज के बेहतर मूल्य के लिए लगभग 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये का कुल प्रावधान रखा गया है। सिंचाई, भंडारण, फसल सुरक्षा और कृषि प्रसंस्करण पर विशेष ध्यान देकर “हर उपज को दाम” वाले वक्तव्य को बल दिया जा रहा है।

GYANII का N है नारी शक्ति को बढ़ावा देना इसीलिए इस बजट में लाड़ली बहना योजना, स्वरोजगार योजनाएँ और महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त करने का भरपूर प्रयास किया गया हैं। महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देने और आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में इस बजट में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। 

GYANII का पहला I है इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इसमें पूंजीगत व्यय को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 4.80 प्रतिशत अनुमानित किया गया है। अधोसंरचना में 30 प्रतिशत की वृद्धि इस बात का संकेत है कि सड़क, जल, विद्युत, डिजिटल नेटवर्क और शहरी विकास पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित किया गया है। “हर घर जल, आपके द्वार” जैसे संकल्पों को आधार दे रहा है मध्यप्रदेश का बजट। 

GYANII का दूसरा I और अंतिम अक्षर खड़ा है इंडस्ट्री के लिए। इसके लिए राज्य के इस बजट में औद्योगिकीकरण को गति देने के लिए निवेश-अनुकूल वातावरण, भूमि बैंक, लॉजिस्टिक्स और नई औद्योगिक नीतियों पर काम किया गया है। 2026-27 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 18.48 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.69 प्रतिशत अधिक है।इससे संकेत मिलता है कि उद्योग और सेवा क्षेत्र विकास के प्रमुख इंजन होंगे।

मध्यप्रदेश के इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता “रोलिंग बजट” की अवधारणा रही है। जिसके तहत 2026-27 के साथ 2027-28 और 2028-29 की संभावित रूपरेखा भी पेश की गई है। ऐसी पहल करने वाला मध्यप्रदेश संभवतः  देश का पहला राज्य है। “रोलिंग बजट”से वित्तीय नियोजन अधिक पारदर्शी, दीर्घकालिक और परिणामोन्मुखी बनेगा ऐसी कामना की जा सकती है। इसके अलावा “जीरो बेस्ड बजटिंग” की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सभी योजनाओं का नए सिरे से परीक्षण किया गया है। “जीरो बेस्ड बजटिंग” वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही का बड़ा संकेत है।

केंद्रीय प्रबंधन और कुशलता से वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ रही है। उस पर ऐसे समय में मध्यप्रदेश ने “समृद्ध मध्यप्रदेश @2047” का दृष्टिपत्र तैयार किया है। जिसका लक्ष्य है 2047 तक राज्य का GSDP 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना और प्रति व्यक्ति आय 22 लाख रुपये से अधिक करना।यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी ज़रूर लगता है मगर वर्तमान वृद्धि दर और पूंजी निवेश की दिशा को देखते हुए यह असंभव भी नहीं लगता।

राज्य में प्रशासनिक संवेदनशीलता के साथ विभिन्न अंचलों में मंत्रि-परिषद की बैठकें आयोजित की गई क्षेत्रीय अपेक्षाओं को समझा गया, योजनाओं का स्थानीयकरण किया गया। ग्रामीण भूमि अधिकार, दुग्ध विकास योजना, सिंचाई परियोजनाएँ और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम ये सभी मिलकर समावेशी विकास की तस्वीर प्रस्तुत करता हैं।

प्रदेश का राजकोषीय घाटा वैधानिक सीमा के भीतर GSDP का 3.87 प्रतिशत अनुमानित रहा है। मध्यम अवधि ऋण प्रबंधन फ्रेमवर्क को मज़बूत करने और उसे कम ब्याज दर वाले ऋणों में रूपांतरण का निर्णय प्रदेश के मोहन सरकार के वित्तीय विवेक को दर्शाता है।प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और सरल बनाने के लिए मध्यप्रदेश का नया बजट मैनुअल तैयार किया गया है।

लाड़ली बहना, संबल, सामाजिक पेंशन और औद्योगिक निवेश के वादों को बजटीय प्रावधानों से जोड़ कर  मध्यप्रदेश की सरकार ने अपने इस बजट के ज़रिए “यथा वाचो तथा क्रिया” के मंत्र को दोहराया है। राज्य के बजट का संदेश स्पष्ट है“सच्चा वादा, पक्का काम।”

डॉ. मोहन यादव सरकार के इस बजट को वर्तमान वर्ष की योजना नहीं बल्कि 2047 के विकसित मध्यप्रदेश की आधारशिला भी कह सकते हैं। यदि योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से हो पाया  तो यह बजट वास्तव में “समृद्ध मध्यप्रदेश, सम्पन्न मध्यमवर्ग” के सपने को साकार करने वाला साबित हो सकता है।

वास्तविकता तो यह है कि  किसी भी बजट की सफलता उसके आंकड़ों से नहीं बल्कि उसकी वजह से आम नागरिकों  के जीवन में आए बदलाव से मापी जाती है। आने वाला वर्ष बताएगा कि “ज्ञानी बजट” केवल दस्तावेज था या परिवर्तन की दिशा में बढ़ाया गया एक निर्णायक कदम।

लेखक : संदीप अखिल
सलाहकार संपादक न्यूज़ 24 एमपी सीजी / लल्लूराम डॉट कॉम