हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर की युवा पर्वतारोही आकांक्षा शर्मा कुटुम्बले ने वो कर दिखाया, जिसका सपना देखने से भी लोग हिचकते हैं। अफ्रीका की सबसे ऊँची चोटी Mount Kilimanjaro पर 19,341 फीट की ऊंचाई तक पहुँचकर उन्होंने इतिहास रच दिया। बर्फ, बर्फीली हवाएँ और कम होती ऑक्सीजन—इन सबको चुनौती देते हुए आकांक्षा ने शिखर फतह किया और इंदौर का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमका दिया।यह उनकी पहली बड़ी जीत नहीं है। इससे पहले वे यूरोप की सबसे ऊँची चोटी Mount Elbrus को भी जीत चुकी हैं। खास बात यह कि ये दोनों चोटियाँ दुनिया की प्रतिष्ठित ‘Seven Summits’ सूची में शामिल हैं।
ऑक्सीजन कम, हौसला ज्यादा
किलिमंजारो को दुनिया का सबसे ऊँचा “फ्री-स्टैंडिंग माउंटेन” माना जाता है। भूमध्य रेखा के करीब होने के कारण यहाँ मौसम का मिजाज पल-पल बदलता है। शिखर की ओर बढ़ते समय ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरता है। आकांक्षा को भी साँस लेने में दिक्कत हुई, हर कदम भारी लग रहा था। तापमान माइनस 12 डिग्री और 20 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलती हवा—लेकिन हौसले की गर्मी ने ठंड को मात दे दी।
शिखर पर कानी साड़ी, संस्कृति का संदेश
शिखर पर पहुँचकर आकांक्षा ने कश्मीरी कानी साड़ी पहनकर भारतीय पहचान का संदेश दिया। उनका कहना है कि कश्मीर उनकी कर्मभूमि रहा है, वहीं से उन्होंने ट्रेनिंग ली। बेसिक और एडवांस कोर्स उन्होंने Jawahar Institute of Mountaineering से किए हैं। कश्मीर की चोटियों पर अभ्यास ने उन्हें मजबूत बनाया। इसलिए उन्होंने तय किया था कि किलिमंजारो की चोटी पर कानी साड़ी पहनकर ही तस्वीर लेंगी।
अकेली भारतीय पर्वतारोही
यह अभियान उन्होंने तंजानिया की ‘Safari Touch’ कंपनी के साथ पूरा किया। टीम में वे इकलौती भारतीय पर्वतारोही थीं। उनके साथ कंपनी का मैनेजर और ट्रेक लीडर मौजूद था, लेकिन चुनौती से जूझना उन्हें खुद ही था।
‘Seven Summits’ क्या है?
दुनिया के सातों महाद्वीपों की सबसे ऊँची चोटियों को ‘Seven Summits’ कहा जाता है। पर्वतारोहण की दुनिया में इसे फतह करना सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। किलिमंजारो और एलब्रुस इसी सूची का हिस्सा हैं।

तैयारी में नहीं छोड़ी कोई कसर
आकांक्षा ने इस मिशन के लिए जमकर तैयारी की। रोजाना रनिंग, जिम में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, सीढ़ियों पर चढ़ने-उतरने की प्रैक्टिस और प्राणायाम—सब कुछ नियमित किया। पाँचवीं मंजिल पर रहने का फायदा भी मिला, क्योंकि रोज सीढ़ियाँ चढ़ना-उतरना उनके अभ्यास का हिस्सा बन गया।

आगे की उड़ान
सिविल इंजीनियरिंग पेशे से जुड़ी आकांक्षा के लिए पर्वतारोहण सिर्फ शौक नहीं, जुनून है। अब उनका लक्ष्य है बाकी ‘Seven Summits’ को भी फतह करना। समयसीमा तय नहीं, लेकिन इरादे चट्टान जैसे मजबूत हैं। इंदौर की इस बेटी ने साबित कर दिया—ऊँचाई पहाड़ की नहीं, हौसले की होती है।
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