दिल्ली सरकार ने राजधानी में सरकारी जमीन और भवनों के बिखरे आंकड़ों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अपनी करीब 14 हजार अचल संपत्तियों को नई एसेट मैनेजमेंट प्रणाली में दर्ज कर लिया है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी भूमि और भवनों का समग्र डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है, ताकि उनके उपयोग, रखरखाव और योजना निर्माण में पारदर्शिता और दक्षता लाई जा सके। अधिकारियों का मानना है कि इससे भूमि संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ-साथ अनधिकृत कब्जों और विवादों को रोकने में भी मदद मिलेगी।

दिल्ली सरकार की नई डिजिटल एसेट मैनेजमेंट प्रणाली में राजधानी के लगभग 50 विभागों की संपत्तियां शामिल की गई हैं। इस सूची में प्रमुख भूमि स्वामित्व एजेंसियां जैसे दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड, लोक निर्माण विभाग और दिल्ली जल बोर्ड भी शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार इन सभी संस्थाओं की जमीन और भवनों का विस्तृत विवरण अब एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे सरकारी संपत्तियों का समन्वित प्रबंधन संभव होगा। यह कदम भूमि संसाधनों के बेहतर उपयोग और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी आंकड़ों में केवल उपयोग में आ रही इमारतें ही नहीं, बल्कि खाली पड़ी जमीन और लीज पर दी गई संपत्तियां भी दर्ज की गई हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक संपत्तियों की प्रकृति अलग-अलग है कुछ विकसित भवन हैं तो कुछ खुले भूखंड। इस व्यापक सूची से सरकारी भूमि और भवनों की वास्तविक स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

स्कूल, अस्पताल और पार्क के लिए जमीन तलाशना होगा आसान

सरकार का मानना है कि सरकारी संपत्तियों की नई डिजिटल एसेट मैनेजमेंट प्रणाली राजधानी में नागरिक सुविधाओं के विस्तार को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस पहल के जरिए स्कूल, अस्पताल, पार्क और अन्य सार्वजनिक ढांचे विकसित करने के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान अब अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी। अधिकारियों के अनुसार पहले विभिन्न विभागों में रिकॉर्ड बिखरे होने के कारण किसी परियोजना के लिए जमीन तलाशने में काफी समय और संसाधन खर्च होते थे। अब सभी संपत्तियों का डेटा एक ही मंच पर उपलब्ध होने से योजना निर्माण और निर्णय प्रक्रिया तेज होगी।

सरकार का कहना है कि इस प्रणाली से शहरी विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और जरूरत वाले क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। साथ ही भूमि के बेहतर उपयोग से अनावश्यक देरी और प्रशासनिक बाधाओं में भी कमी आएगी।

बिखरे और पुराने डेटा से मिलेगी मुक्ति

अब तक अलग-अलग विभाग अपनी संपत्तियों का रिकॉर्ड अलग-अलग रखते थे, जिससे जानकारी बिखरी हुई, असंगठित और कई मामलों में पुरानी हो जाती थी। इस कारण किसी जमीन के स्वामित्व, वर्तमान उपयोग और वास्तविक स्थिति की समेकित जानकारी जुटाना मुश्किल होता था। उपयुक्त भूमि की खोज में समय और संसाधनों की भी अधिक खपत होती थी।

नई डिजिटल प्रणाली का उद्देश्य इन कमियों को दूर करना है। इसके तहत विभिन्न विभागों के भूमि और संपत्ति रिकॉर्ड को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा, जिससे अद्यतन और सटीक जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सके। अधिकारियों के अनुसार, इससे योजना निर्माण की प्रक्रिया तेज होगी और सार्वजनिक परियोजनाओं को समय पर लागू करने में मदद मिलेगी।

GIS तकनीक और सैटेलाइट मैपिंग से होगी निगरानी

सरकार ने भूमि और सरकारी संपत्तियों के प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए ‘दिल्ली एसेट मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम’ (DAMIS) लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। नई व्यवस्था एक केंद्रीकृत, जीआईएस आधारित डिजिटल भंडार के रूप में काम करेगी, जिसमें विभिन्न विभागों की जमीन और संपत्तियों का पूरा ब्योरा एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा।

इस प्रणाली में उच्च-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी और GIS तकनीक के जरिए जमीन की सटीक मैपिंग की जाएगी। डैशबोर्ड और विश्लेषणात्मक टूल्स की मदद से संपत्तियों की निगरानी, स्थिति का आकलन और रिपोर्ट तैयार करना पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा। विभाग अपने-अपने भूखंडों का विवरण दर्ज कर कस्टमाइज्ड रिपोर्ट भी निकाल सकेंगे, जिससे योजना निर्माण और संसाधन प्रबंधन में सुविधा मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से भूमि उपयोग की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, अवैध कब्जों पर नजर रखना आसान होगा और सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान तेजी से की जा सकेगी।

20 दिन में डेटा अपडेट करने के निर्देश

पिछले महीने मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश जारी कर 20 दिनों के भीतर अपनी संपत्तियों का संपूर्ण विवरण इस प्रणाली में दर्ज करने को कहा था। साथ ही विभागों को जानकारी की पुष्टि प्रमाण पत्र के रूप में जमा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस सख्ती से साफ है कि सरकार इस परियोजना को प्राथमिकता दे रही है और भूमि प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए गंभीर है।

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