एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में गलगोटिया विश्वविद्यालय के भारी ब्लंडर के बाद उसे कथित तौर पर एक्सपो खाली करने को कहा गया है. यूनिवर्सिटी द्वारा कथित तौर पर चीनी-निर्मित रोबोटिक डॉग को अपनी खोज के रूप में पेश किया था. यहां इस बात को देखने की जरूरत है कि क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपने आवेदन में सरकार को पहले से ये बताया था कि वो एक चाइनीज माल को भारत के AI समिट के मंच पर दिखाने वाली है. इस यूनिवर्सिटी के प्रबंधन ने अपने एक झूठ को बचाने के लिए कई और झूठ बोले. प्रोफेसर नेहा सिंह के दोनों बयानों को देखेंगे तो आपको खुद समझ आएगा कि उन्होंने ही चीन के रोबोटिक डॉग को अपनी यूनिवर्सिटी का रोबोटिक डॉग बताया और बाद में इस झूठ को छिपाने के लिए कई और झूठ बोले.
रोबोटिक डॉग विवाद में भी शामिल रहीं यूनिवर्सिटी की संचार विभाग की प्रोफेसर नेहा सिंह का एक वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें वह एक रिपोर्टर को इन हाउस सॉकर ड्रोन के बारे में समझा रही हैं. उनका कहना है कि ड्रोन की एंड टू एंड इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी कैंपस में ही की गई है.
हालांकि, गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने जो किया, हम उसके खिलाफ हैं और आज आप इस ड्रोन को भी देखिए, जिसे इसी यूनिवर्सिटी ने अपने पवेलियन में लगाया था और अब इसका भी मजाक उड़ रहा है.
इस घटना के बाद हम एक ही बात कहना चाहते हैं कि अगर भारत को AI के क्षेत्र में एक बड़ा दावेदार बनना है तो हमारी सरकार और हमारे युवाओं को Innovation और रिसर्च के मामले में अपनी स्थिति को सुधारना होगा और कई बड़े बदलाव करने होंगे.
आज भारत Global Innovation Index की सूची में 38वें स्थान पर है जबकि पूरी दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी हमारे देश में ही रहती है और यहां हम चीन से भी बहुत पीछे हैं. चीन इसी Global Innovation Index में 10वें स्थान पर है, फ्रांस 13वें और इजरायल 14वें स्थान पर है जबकि अमेरिका नई-नई खोज करने के मामले में तीसरे स्थान पर है.
इसके अलावा यहां ये भी देखना होगा कि प्रोफेसर नेहा सिंह ने झूठ क्यों बोला और गलगोटिया यूनिवर्सिटी अब ये क्यों कह रही है कि ये सारा बखेड़ा नेहा सिंह की वजह से हुआ है. ये मामला एक एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी का है, जो इस समिट में ना सिर्फ भारत का प्रतिनिधित्व कर रही थी बल्कि साथ-साथ अपना प्रचार भी कर रही थी.
लेकिन इस बात को जानते हुए भी गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने शब्दश: ये कहा कि इस रोबोटिक डॉग को उनकी यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने विकसित किया है. बड़ी बात ये है कि जब चीन के मीडिया ने इस दावे का खंडन किया और गलगोटिया यूनिवर्सिटी के झूठ की पोल खोल दी, तब भी इस यूनिवर्सिटी ने अपने आधिकारिक बयान में इस झूठ को स्वीकार नहीं किया, और ये कहा कि यूनिवर्सिटी ने कभी इस बात का दावा नहीं किया कि इस रोबोटिक डॉग को उसके द्वारा बनाया गया है. प्रोफेसर नेहा सिंह ने भी खुद अपने झूठ को ‘स्वीकार’ करने से इनकार कर दिय और कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है जबकि ये सच नहीं है.
सरकार ने भी इस समिट से गलगोटिया यूनिवर्सिटी के पवेलियन को खाली करा लिया और इस पवेलियन की लाइटों को भी बंद कर दिया गया.
गलगोटिया यूनिवर्सिटी की तरफ से थर्माकोल ड्रोन पर अब तक कोई साफ बयान सामने नहीं आया है. पहले रोबोट डॉग विवाद पर यूनिवर्सिटी ने सफाई दी थी. उन्होंने कहा था कि मशीन स्टूडेंट्स के लर्निंग टूल के तौर पर रखी गई थी. लेकिन खुद बनाया जैसा कोई दावा नहीं किया गया था.
गलगोटिया यूनिवर्सिटी सॉकर ड्रोन (soccer drone) को लेकर विवादों में घिर गई है. बताया जा रहा है कि यह सॉकर ड्रोन साउथ कोरिया में बना हुआ है. लेकिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने दावा किया है कि इसे यूनिवर्सिटी ने पूरी तरह से खुद विकसित किया है.
उन्होंने कहा कि यह एक दिलचस्प डिवाइस है. इसकी एंड टू एंड इंजीनियरिंग से लेकर इसके एप्लीकेशन तक सब कुछ यूनिवर्सिटी में ही विकसित किया गया है. सिंह ने यह भी दावा किया कि गैलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपने परिसर में भारत का पहला ड्रोन सॉकर एरीना विकसित किया है.
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृ्ष्णनन ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी से स्टॉल खाली कराने के सवाल पर कहा कि हम चाहते हैं कि एक्सपो में लोग जो भी डिस्प्ले करते हैं, उसमें वास्तविक और प्रामाणिक काम ही दिखाई दे. इसका उद्देश्य किसी और तरह से इसका उपयोग करना नहीं है. हम नहीं चाहते कि यहां जो डिस्प्ले हो, उस पर विवाद हो इसलिए यह जरूरी है कि एक आचार-संहिता का पालन किया जाए. गलत जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता. हम इस मुद्दे पर किसी विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते. मैं यह नहीं कह रहा कि वे सही हैं या गलत. हम बस यह चाहते हैं कि किसी प्रकार का विवाद न हो.
गलगोटिया यूनिवर्सिटी का नाम भारत की उन प्राइवेट यूनिवर्सिटी में आता है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई कराई जाती है. अगर आप चार साल के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग में बीटेक की पढ़ाई करते हैं तो हर साल की पढ़ाई का खर्च करीब दो लाख रुपये होगा और चार साल की पढ़ाई का खर्च लगभग 8 लाख रुपये होगा. इस यूनिवर्सिटी में प्लेसमेंट 98 प्रतिशत तक माना जाता है, जिसका मतलब ये है कि अगर 100 छात्र इस यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं तो उनमें से 98 छात्रों की पढ़ाई के बाद ही इस यूनिवर्सिटी की मदद से नौकरी लग जाती है.
लेकिन भारत के AI समिट में इस यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर के एक झूठ ने भारत का काफी नुकसान किया और अब राहुल गांधी से लेकर विपक्ष के नेता और कई लोग इस घटना को आधार बनाकर इस अंतर्राष्ट्रीय AI सम्मेलन को निशाना बना रहे है और अब इसका मजाक भी बनाया जा रहा है.
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