चारा घोटाला के जिस चाईबासा कोषागार अवैध निकासी मामले में लालू यादव को सजा हुई थी उसी मामले में IAS अधिकारी सजल चक्रवर्ती को भी सजा सुनायी गयी थी। गंभीर बीमारियों से ग्रसित सजल चक्रवर्ती का जब 2020 में निधन हुआ था उस समय वे जमानत पर बाहर थे। कभी मिलिट्री में गए, फिर पत्रकार भी बने। साथी ने उलाहना दिया तो बन गए IAS। लेकिन इस प्रतिभाशाली अफसर को घोटाले का दाग ले डूबा। पढ़िए सैन्य परिवार के मेधावी IAS की दर्दनाक कहानी।

घोटाले का दाग एक सफल जीवन का अंत कर देता है। सुकीर्ति अपयश में बदल जाती है। अंतिम समय में वे बिल्कुल अकेले पड़ गये थे। अपना कहने वाला कोई नहीं था। दो शादियां की लेकिन दोनों असफल रहीं। कोई संतान नहीं थी।

माता-पिता और भाई का पहले ही निधन हो चुका था। बीमारी, चारा घोटाला के अपमान और एकाकी जीवन के कारण वे डिप्रेशन में चले गये थे। पैसा, पद का रुआब, शान शौकत कुछ भी काम न आया। एक प्रतिभाशाली व्यक्ति के जीवन का दुखद अंत हो गया।

सजल चक्रवर्ती एक मेधावी विद्यार्थी थे। लेकिन मन स्थिर नहीं था। उस समय बिहार का बंटवारा नहीं हुआ था। रांची के संत जेवियर स्कूल में पढ़ते थे। पिता और भाई सेना में बड़े अधिकारी थे। परिवार की परम्परा के देखते हुए उन्हें भी सैन्य अधिकारी बनाने की कोशिश की गयी। मिलिट्री कॉलेज देहरादून में सेलेक्शन हुआ। पढ़ाई बीच में छोड़ कर भाग आये। फिर पढ़ने के लिए पूना गये। वहां पढ़ाई के साथ-साथ अखबारों में काम किया। वहां से भी रांची लौट आये। ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई के दौरान ही वे रांची से निकलने वाले अंग्रेजी अखबार न्यू रिपब्लिक में रिपोर्टर के रूप में भी काम करते थे। उनकी धारदार रिपोर्टिंग कुछ ही दिनों में ही चर्चित हो गयी।

वे साइकिल से अखबार के दफ्तर आते थे। कहा जाता है कि अखबार में काम करने के दौरान ही उनके एक सहयोगी ने तंज कस दिया, क्या तुम खुद को आईएएस समझते हो। ये बात सजल चक्रवर्ती को चुभ गयी। उन्होंने UPSC की परीक्षा देने की ठान ली। IAS सजल चक्रवर्ती ने खुद कहा था, उस समय मेरे पास करने के लिए कुछ था नहीं। सोचा UPSC की तैयारी ही कर लेता हूं। खूब पढ़ाई की। 1980 में उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए हो गया। उन्हें बिहार कैडर मिला। (बाद में बिहार का बंटवारा होने पर वे झारखंड कैडर में चले गये थे।)

IAS सजल चक्रवर्ती की पहचान मिलने के बाद सेवाकाल के दौरान चाईबासा में डिप्टी कमिश्नर (कलेक्टर) बने। वे 1992 से 1995 तक चाईबासा के डीसी रहे थे। 1996 में जब चारा घोटाला उजागर हुआ तो चाईबासा कोषागार अवैध निकासी मामले में उनका भी नाम आया। इस मामले में वे पहली बार 1998 में जेल गये। 18 महीने तक जेल में रहे। 2008 में उन्हें रांची स्थित सीबीआइ की स्पेशल कोर्ट ने चारा घोटाला मामले में दोषी ठहराया था। उन्होंने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

झारखंड हाईकोर्ट ने अगस्त 2012 में सजल चक्रवर्ती को चारा घोटाले के मामले में बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने सीबीआइ के स्पेशल कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। स्पेशल कोर्ट ने उन्हें 2008 में साढ़े चार की सजा सुनायी थी। बरी होने बाद सजल चक्रवर्ती 2014 में झारखंड के मुख्य सचिव भी बने।

सीबीआई ने झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए इस मामले की फिर सुनवाई का फैसला दिया।

रांची स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत में इस मामले की दोबारा सुनवाई हुई। नवम्बर 2017 में स्पेशल कोर्ट ने सजल चक्रवर्ती को दोषी ठहराते हुए पांच साल सश्रम कारावास की सजा सुनायी। दो साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद 2019 में उन्हें जमानत मिली थी। इलाज के दौरान 2020 में उनका बेंगलुरु में निधन हो गया था। एक IAS अधिकारी जो एक राज्य का मुख्य सचिव रह चुका था, आखिरी वक्त में बिल्कुल तनहा था।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m