मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका को साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान पर नया हमला किया गया तो इसके ‘गंभीर और खतरनाक परिणाम’ हो सकते हैं. सऊदी अरब के अल अरबिया टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में लावरोव ने कहा कि हालात पहले ही संवेदनशील हैं और किसी भी सैन्य कार्रवाई से स्थिति नियंत्रण से बाहर जा सकती है. लावरोव ने कहा, ‘परिणाम अच्छे नहीं होंगे. लावरोव की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब रूस, चीन और ईरान रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास कर रहे हैं.

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ईरान पर किसी भी नए हमले के गंभीर नतीजे होंगे. उन्होंने कहा कि क्षेत्र पहले ही तनाव में है और सैन्य कार्रवाई से बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.

लावरोव ने यह भी कहा कि खाड़ी देशों और अरब दुनिया से उन्हें साफ संदेश मिल रहे हैं कि कोई भी क्षेत्र में नया युद्ध नहीं चाहता. लावरोव ने कहा, ‘हर कोई समझता है कि यह आग से खेलना होगा’. रूस का कहना है कि ईरान को परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम का अधिकार है और समाधान बातचीत से निकाला जाना चाहिए, न कि बमबारी से.

गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक ‘मारीटाइम सिक्योरिटी बेल्ट 2026’ नाम से हो रहे इन युद्धाभ्यासों को क्षेत्र में शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है. रूसी मीडिया के मुताबिक, स्टेरेगुश्ची-क्लास कॉर्वेट ‘स्टोइकी’ ईरान के रणनीतिक नौसैनिक अड्डे बंदर अब्बास पहुंच चुका है. यहीं से संयुक्त अभ्यास की शुरुआत होनी है. ये कवायद ओमान की खाड़ी और उत्तरी हिंद महासागर में होने वाली है.

ईरान ने इसे ‘समुद्री सुरक्षा मजबूत करने और सैन्य सहयोग गहरा करने’ की कवायद बताया है. लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह अमेरिका को सीधा संदेश है- खासकर तब, जब अमेरिकी युद्धपोत भी क्षेत्र में सक्रिय हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने एयरस्पेस को लेकर NOTAM (Notice to Airmen) जारी किए हैं. कुछ विश्लेषकों ने दावा किया है कि कई ‘गनफायर जोन’ चिन्हित किए गए हैं. तेहरान के पास ड्रोन से जुड़ी गतिविधि देखी गई.

ओमान की खाड़ी की दिशा में रॉकेट/मिसाइल परीक्षण के संकेत मिले हैं. यह संकेत देता है कि ईरान संभावित एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण कर सकता है. अगर ऐसा होता है तो होर्मुज़ जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग में तनाव और बढ़ सकता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है.

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