रायपुर। कृषि क्षेत्र में बिजली दरों को लेकर किसानों की चिंताओं और सुझावों को लेकर आज छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष एक महत्वपूर्ण याचिका प्रस्तुत की गई। यह याचिका भूपेन्द्र शर्मा के साथ पेश की गई, जिसमें कृषि क्षेत्र के लिए विद्युत दरों और संबंधित विषयों पर विस्तृत पक्ष रखा गया।
सेवानिवृत्त IAS अनुराग पांडेय ने बताया, याचिका में कहा गया कि आयोग द्वारा जनसुनवाई के लिए प्रस्तुत सभी प्रस्ताव हिंदी भाषा में भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि आम उपभोक्ता और किसान उन्हें समझकर अपना सुझाव दे सकें। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्र की भागीदारी मजबूत होगी।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले 50 वर्षों में सरकारों द्वारा ग्रामीण और कृषि विद्युत आधारभूत संरचना के विकास के लिए करोड़ों रुपये का अनुदान दिया गया है। इसे केवल कृषि मद में ही शामिल किया जाना चाहिए। इससे इस क्षेत्र की फिक्स्ड कॉस्ट लगभग शून्य हो सकती है और केवल संचालन एवं रखरखाव (O&M) की लागत ही गणना में आएगी, जिससे कृषि बिजली दरों में कमी संभव है। यह भी मांग की गई कि इस अनुदान को उद्योग और वाणिज्य क्षेत्र में विभाजित नहीं किया जाए।
किसानों के लिए Time of the Day Tariff और Solar Hours की सुविधा लागू करने का सुझाव भी दिया गया। याचिका में कहा गया कि दिन के समय जब बिजली एक्सचेंज से बहुत कम दरों पर उपलब्ध होती है तो इसका लाभ किसानों को भी दिया जाना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में यह बताया गया कि पिछले वर्षों में कृषि क्षेत्र की बिजली दरों में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि उद्योग और वाणिज्य क्षेत्र में केवल 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यानी कृषि क्षेत्र में बढ़ोतरी लगभग तीन गुना रही है, जिसे कम करना आवश्यक है। इसके समर्थन में विस्तृत तालिका भी प्रस्तुत की गई।
इसके अलावा किसानों के लिए लागू योजनाओं के तहत 5 हॉर्सपावर तक के पंपों को मिलने वाली छूट को सभी पंपों पर लागू करने की मांग की गई, ताकि किसानों को भी उद्योगों की तरह समान लाभ मिल सके। साथ ही अस्थायी विद्युत कनेक्शन की प्रक्रिया को सरल बनाने, ट्रांसफॉर्मरों की उपलब्धता और क्षमता बढ़ाने तथा बिजली बकाया वसूली के लिए बैंकिंग प्रणाली की तर्ज पर वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना लागू करने का सुझाव भी दिया गया। आयोग ने सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है।
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