गाजा संकट पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने गुरुवार को पर्यवेक्षक (Observer Nation) के रूप में हिस्सा लिया. भारत इस पहल का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन वॉशिंगटन डीसी में आयोजित बैठक में नई दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया गया. इस वर्ष घोषित किए गए इस बोर्ड में 27 देश शामिल हैं, जिनमें अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब और यूएई के साथ इजरायल भी शामिल है. हालांकि, इस समूह में फिलिस्तीनी प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है.
वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास की ‘चार्ज डी अफेयर्स’ नमग्या खम्पा ने ‘डोनाल्ड जे. ट्रंप इंस्टीट्यूट ऑफ पीस’ में आयोजित इस सत्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया. ट्रंप ने इस बोर्ड को गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने का प्रमुख मंच बताया है.
भारत ने आधिकारिक तौर पर अभी इस पहल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है, जिसे ट्रंप गज़ा पट्टी के पुनर्निर्माण के लिए एक प्रमुख माध्यम के रूप में पेश कर रहे हैं.
इस पहल को संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है. ट्रंप ने कहा है कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ भविष्य में यूएन की जगह ले सकता है, क्योंकि उनके अनुसार वैश्विक संस्था अपनी संभावनाओं के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाई है.
इस वर्ष घोषित किए गए इस बोर्ड में सताईस देश शामिल हैं, जिनमें अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब और यूएई के साथ इजरायल भी शामिल है. हालांकि, इस समूह में फिलिस्तीनी प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है.
जनवरी 22 को दावोस में आयोजित लॉन्च समारोह में भारत मौजूद नहीं था, जहां ट्रंप ने औपचारिक रूप से इस पहल की घोषणा की थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन वैश्विक नेताओं में शामिल थे, जिन्हें इजरायल-हमास युद्धविराम प्रक्रिया के दूसरे चरण के दौरान इस बोर्ड से जुड़ने का न्योता दिया गया था.
ट्रंप ने गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 10 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन फंड के स्रोत या अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है.
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