पटना। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर, एमटीएस, स्वीपर और टेक्नीशियन समेत ग्रेड-3 और ग्रेड-4 के आउटसोर्स कर्मचारी पिछले 5 महीनों से बिना वेतन के काम कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि जब भी वे अपनी सैलरी की मांग करते हैं, उन्हें “एग्रीमेंट न होने” का हवाला देकर टाल दिया जाता है। परीक्षा विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार के अनुसार, कुलपति और रजिस्ट्रार से मिलने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

​सालों से आर्थिक शोषण का आरोप

कर्मचारियों की शिकायत सिर्फ बकाया वेतन तक सीमित नहीं है। उनका दावा है कि:

​वेतन कटौती: सितंबर 2021 से लगातार वेतन काटकर दिया जा रहा है।

​एरियर का मुद्दा: 2018 से अब तक वेतन अंतर राशि का भुगतान लंबित है।

​नियमों की अनदेखी: बिहार सरकार ने 13 बार गजट जारी कर मानदेय बढ़ाया, लेकिन यूनिवर्सिटी ने इसे केवल 3 बार लागू किया।

​गलत टैक्स वसूली: कर्मचारियों के वेतन से 18% GST और सेवा शुल्क काटा जा रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है।

​अस्तित्व की लड़ाई और कानूनी कदम

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनसे काम नियमित कर्मचारियों की तरह लिया जाता है, लेकिन हक मांगने पर उन्हें ‘बाहरी’ बताकर दरकिनार कर दिया जाता है। 2018 से बोनस और 2021 से सैलरी स्लिप न मिलने से नाराज ये कर्मी अब लेबर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को मजबूर हैं ताकि एजेंसी को लीगल नोटिस भेजा जा सके।