कुंदन कुमार/ पटना। ​बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए बिगुल बज चुका है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही राजनीतिक गलियारों में गणित बिठाने का खेल शुरू हो गया है। इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प है, क्योंकि संख्या बल के लिहाज से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शह-मात का खेल साफ नजर आ रहा है।

​एकजुटता की अग्निपरीक्षा

​वर्तमान बिहार विधानसभा की स्थिति देखें तो विपक्ष के पास फिलहाल 41 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट सुरक्षित करने के लिए यह संख्या काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि संपूर्ण विपक्ष (महागठबंधन) पूरी तरह एकजुट होकर मैदान में उतरता है, तो वे आसानी से एक सीट अपने पाले में कर सकते हैं।

​शीर्ष नेतृत्व के पाले में गेंद

​इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मुख्य प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करेगा कि आगे की रणनीति क्या होगी। फिलहाल हम पूरी तरह एकजुट हैं और योग्य प्रत्याशी को मैदान में उतारने की कवायद शुरू हो चुकी है।
​तिवारी ने भरोसा जताया कि मुद्दों के आधार पर विपक्ष एक साथ खड़ा है और सही समय पर सही फैसला लिया जाएगा।

​योग्य उम्मीदवार की तलाश

​विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसे साझा उम्मीदवार को चुनने की है, जिस पर सभी घटक दल सहमत हों। आरजेडी के बयानों से साफ है कि वे इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहते। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विपक्ष अपनी एकजुटता बरकरार रखते हुए सत्ता पक्ष को कड़ी चुनौती दे पाएगा या नहीं।