केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में नागरिकता से जुड़े आवेदनों की जांच और मंजूरी के लिए एक विशेष समिति बना दी है। गृह मंत्रालय ने 20 फरवरी 2026 को आदेश जारी कर बताया कि यह समिति नागरिकता अधिनियम 1955 और उसके नियमों के तहत बनाई गई है। यह समिति मुख्य रूप से उन लोगों के आवेदन देखेगी जो संशोधित कानून के तहत भारतीय नागरिकता लेना चाहते हैं। समिति की अध्यक्षता पश्चिम बंगाल के जनगणना संचालन निदेशालय के डिप्टी रजिस्ट्रार जनरल करेंगे। इसके अलावा इसमें खुफिया ब्यूरो, विदेशी पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ), राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), डाक विभाग और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।
सरकार ने बताया कि यह समिति आवेदन की जांच, दस्तावेजों की पुष्टि और नागरिकता देने की सिफारिश जैसे काम करेगी। यह व्यवस्था नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) 2019 के तहत बनाई गई प्रक्रिया का हिस्सा है। सीएए के अनुसार पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता पाने का रास्ता दिया गया है।
पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश से लंबी सीमा होने और यहां पहले से प्रवासियों के आने के कारण इसे महत्वपूर्ण राज्य माना जाता है। नई समिति बनने से अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ेगा और नागरिकता आवेदनों की जांच प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
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