अनिल मालवीय, भोपाल। मध्यप्रदेश में एसआईआर(मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण) की प्रक्रिया पूरी हो गई है। एसआईआर को लेकर मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजीव कुमार झा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने बताया कि- एसआईआर की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद एमपी की अंतिम मतदाता सूची में 5 करोड़ 39 लाख, 81 हजार 65 वोटर्स है। फाइनल सूची तैयार होने के बाद मध्यप्रदेश में करीब 34 लाख मतदाता घट गए।

दावे आपत्ति के बाद 5,39,81,065 मतदाता वोटर लिस्ट में शामिल

आज मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। मध्यप्रदेश के सभी नागरिक अभिनंदन के पात्र हैं। इसमें प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी, मीडिया, राजनैतिक दलों का सहयोग मिला। कुल 5,74,06,143 मतदाताओं में से 5,31,31,983 मतदाताओं से गणना पत्र प्राप्त हुए। इन मतदाताओं का डेटा पूरी तरह से डिजिटल किया गया है। दावे आपत्ति के बाद 5,39,81,065 मतदाता वोटर लिस्ट में शामिल हुए है। एमपी में अब 2 करोड 89 लाख 4 हजार 975 मेल वोर्टस और 2 करोड 60 लाख 75 हजार 186 फिमेल वोटर्स और 904 थर्ड जेंडर मतदाता है।

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उज्जैन दक्षिण में मतदाता सूची विवाद गहराया

प्रदीप मालवीय, उज्जैन। उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने का मामला और गंभीर हो गया है। जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष भरत पोरवाल द्वारा आपत्तियां दर्ज कराने के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस प्रकरण में हस्तक्षेप किया है। उन्हें मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा को पत्र लिखकर उज्जैन दक्षिण विधानसभा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान हुई कथित अनियमितताओं की सघन जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। पत्र के साथ उन्होंने भरत पोरवाल के मूल आवेदन को भी संलग्न किया है।

कुल 33,256 मतदाताओं के नाम विलोपित किए गए

एसआईआर अभियान के दौरान उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में कुल 33,256 मतदाताओं के नाम विलोपित किए गए है। एक ही विधानसभा से इतनी बड़ी संख्या में नाम काटे जाने पर कांग्रेस नेता भरत पोरवाल ने गंभीर आपत्ति जताई थी। उनका आरोप है कि ‘फॉर्म-7’ का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग कर झूठी आपत्तियों के आधार पर मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया। भरत पोरवाल ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से 21 फरवरी 2026 को होने वाले मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की भी अपील की थी। अब दिग्विजय सिंह द्वारा पत्र लिखे जाने के बाद इस मामले ने और भी तूल पकड़ लिया है।

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भरत पोरवाल, पूर्व उपाध्यक्ष्य, जिला पंचायत

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