मधुबनी/ मोहम्मद करीमुल्लाह। जिले का जितवारपुर गांव (प्रखंड-रहिका) अब आधिकारिक तौर पर बिहार के पहले क्राफ्ट विलेज के रूप में विकसित होने जा रहा है। वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार और बिहार संग्रहालय, पटना के संयुक्त तत्वावधान में इस ऐतिहासिक परियोजना का शुभारंभ कला-संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद द्वारा किया गया।

​कलाकारों का गढ़ और वैश्विक रिकॉर्ड

​400 घरों वाला जितवारपुर देश का इकलौता गांव है जिसने तीन पद्मश्री (जगदम्बा देवी, सीता देवी, बौआ देवी) दिए हैं। पड़ोसी गांव लहेरियागंज को जोड़ लें तो यह संख्या 5 (शिवन पासवान और शांति देवी सहित) हो जाती है। यहां 18 राष्ट्रीय और 50 से अधिक राज्य स्तरीय पुरस्कृत कलाकार निवास करते हैं। गांव की 90% आबादी खेती के बजाय हस्तशिल्प (मिथिला पेंटिंग, पेपरमेशी, सिक्की और टेराकोटा) पर आश्रित है।

​परियोजना का स्वरूप और बजट

​इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने 9 करोड़ 2 लाख 470 रुपये की स्वीकृति दी है। इसमें 80% केंद्र और 20% बिहार संग्रहालय का योगदान होगा। बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (BSRDC) को कार्यान्वयन एजेंसी बनाया गया है।

​आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा गांव

​परियोजना के नोडल पदाधिकारी अशोक कुमार सिन्हा के अनुसार, अगले एक वर्ष में गांव का कायाकल्प होगा:

​इंफ्रास्ट्रक्चर: भव्य प्रवेश द्वार, पक्की सड़कें और 100 स्ट्रीट लाइट।
​टूरिज्म: 4 कमरों का गेस्ट हाउस, 12 कला स्टॉल और कॉमन फैसिलिटी सेंटर।
​सुंदरीकरण: तीन तालाबों का जीर्णोद्धार और कलाकारों द्वारा घरों की बाहरी दीवारों पर मधुबनी पेंटिंग का निर्माण।

​बिचौलियों से मिलेगी मुक्ति

​बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह और विधायक आसिफ अहमद ने कहा कि इस बाजार से कलाकारों को उनकी कला का सही मूल्य मिलेगा और बिचौलियों का हस्तक्षेप खत्म होगा। यह पहल जितवारपुर के साथ-साथ रांटी और रैयाम जैसे कला प्रधान गांवों के लिए भी नए मार्ग खोलेगी।