कवर्धा. दुनिया भर में पानी (जल) और बानी (मातृभाषा) को लेकर संकट की स्थिति है. इस संकट से लोगों को अवगत कराने मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी की टीम ने हॉफ नदी के किनारे-किनारे पदयात्रा कर रही है. पदयात्रा की शुरुआत 21 फरवरी को विश्व मातृभाषा दिवस के मौके पर हॉफ नदी के उद्गम स्थल से हुई.

कांदावानी जंगल क्षेत्र में मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सीमा में धुरसी गांव से निकली पदयात्रा कई गांवो से गुजरते हुए देर रात पचराही पहुंची. पचराही में रात्रि विश्राम के बाद दूसरे दिन रविवार 22 फरवरी को पदयात्रा बकेला से शुरू होगी और पहले चरण की पदयात्रा पंडरिया में शाम को समाप्त होगी.

28 फरवरी से दूसरे चरण की होगी शुरूआत

दूसरे चरण की पदयात्रा पंडरिया के रोहरा से 28 फरवरी को शुरू होगी और 2 मार्च को तरपोंगी(नांदघाट) शिवनाथ और हॉफ नदी के संगम स्थल पर समाप्त होगी. मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी के संयोजक डॉ. वैभव बेमेतरिहा ने बताया कि पदयात्रा टीम के सदस्य राजीव तिवारी, राजकुमार यादव, ठा. शैलू के साथ यात्रा का पहला चरण आज से शुरू हुआ. यात्रा का उद्देश्य पानी और बानी बचाना है.

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ मुख्य और राजभाषा छत्तीसगढ़ी जो छत्तीसगढ़ियों की मातृभाषा भी है. उसे बचाने सतत अभियान चलाया जा रहा. स्कूली शिक्षा का माध्यम छत्तीसगढ़ी दी जानी चाहिए. दुनिया भर में आज मातृभाषा संकट में है. जो भी पढ़ाई-लिखाई या सरकारी कामकाज की भाषा नहीं वह खत्म होते जा रही है. इसी तरह से पानी भी संकट में है. छत्तीसगढ़ की नदिया बरसाती नदिया बनकर रह गई हैं. गर्मी के साथ शहरों से लेकर गांवों में भीषण जल संकट देखने को मिलता है. हॉफ नदी की स्थिति भी संकटमय बनी हुई.