सोहराब आलम/ मोतिहारी। बिहार के स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही का पर्दाफाश हुआ है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पताही में मरीजों की जान बचाने वाली दवाइयां अलमारियों से निकलकर कूड़े के ढेर में तब्दील हो गई हैं। चिकित्सा प्रभारी के आवास से भारी मात्रा में एक्सपायर्ड दवाएं बरामद हुई हैं, जिनकी कीमत लाखों में आंकी जा रही है।

​सफाई के दौरान खुला ‘राज’

​यह मामला तब सामने आया जब नवनियुक्त चिकित्सा प्रभारी डॉ. शंकर बैठा के लिए आवंटित आवास की सफाई कराई जा रही थी। एक बंद कमरे का दरवाजा खुलते ही वहां दवाओं के दर्जनों कार्टन और पैकेट बिखरे मिले। जांच करने पर पता चला कि ये सभी दवाएं अपनी एक्सपायरी तिथि पार कर चुकी हैं। यह लापरवाही दर्शाती है कि सरकारी संसाधनों को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के बजाय उन्हें सड़ाने के लिए छोड़ दिया गया।

​मरीजों की जेब पर डाका

​सीएचसी पताही के आसपास के ग्रामीण अक्सर अस्पताल में दवाओं की किल्लत की शिकायत करते रहे हैं। जहां गरीब मरीजों को मजबूरी में बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं, वहीं सरकारी स्टॉक का इस तरह नष्ट होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह जनता के हक की चोरी और सरकारी धन की खुली बर्बादी है।

​जांच का भरोसा और जवाबदेही

​वर्तमान प्रभारी डॉ. शंकर बैठा ने स्पष्ट किया कि उन्हें अभी तक पूर्व प्रभारी से पूरी तरह प्रभार नहीं मिला था। आवास की सफाई के दौरान यह खुलासा हुआ। उन्होंने मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को देने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना यह है कि विभाग इस गंभीर भ्रष्टाचार और लापरवाही पर क्या कदम उठाता है।