वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नए और सख्त नियम लागू किए हैं। इसके तहत सभी चिन्हित उद्योगों के लिए पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्सर्जन की अधिकतम सीमा 50 मिलीग्राम प्रति घन मीटर तय की गई है। यह फैसला आईआईटी कानपुर के अध्ययन के आधार पर लिया गया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार करना और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।नए नियमों के अनुसार, बड़े उद्योगों को 1 अगस्त तक और अन्य उद्योगों को 1 अक्टूबर तक इन मानकों को लागू करना होगा। आयोग का मानना है कि इससे औद्योगिक प्रदूषण में स्थायी कमी लाने में मदद मिलेगी और दिल्ली-एनसीआर की हवा को स्वच्छ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
लिमिट तय
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों की सभी औद्योगिक इकाइयों के लिए पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्सर्जन की अधिकतम सीमा 50 मिलीग्राम प्रति घन मीटर तय कर दी है। आयोग के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य औद्योगिक धुएं और धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करना और क्षेत्र की हवा को अधिक सुरक्षित बनाना है। दिल्ली-एनसीआर में उद्योगों से निकलने वाला धुआं न केवल वायु गुणवत्ता को खराब करता है, बल्कि सेकेंडरी पार्टिकुलेट मैटर बनने में भी योगदान देता है, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाता है।
50 मिलीग्राम प्रति घन मीटर का स्तर पर्यावरण के लिए जरूरी
यह फैसला आईआईटी कानपुर के अध्ययन और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की तकनीकी समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। आयोग का मानना है कि 50 मिलीग्राम प्रति घन मीटर का स्तर पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी होने के साथ-साथ तकनीकी रूप से संभव भी है। सीएक्यूएम के अनुसार, नए नियम लागू होने से उद्योगों से निकलने वाले धुएं और धूल में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे न केवल वायु गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
इन उद्योगों के लिए नया स्तर अनिवार्य होगा
इस नए स्तर के लागू होने से उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषण काफी हद तक कम होगा और आसपास रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी लाभ मिलेगा। सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया है कि यह मानक प्रदूषण फैलाने वाली प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के लिए अनिवार्य होगा। इनमें खाद्य और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, बॉयलर या थर्मल हीटर वाले वस्त्र उद्योग, भट्ठियों वाली धातु उद्योग जैसे प्रमुख उद्योग शामिल हैं, जो वायु प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह मानक उन उद्योगों पर लागू नहीं होगा, जिनके लिए पहले से ही किसी कानून या निर्देश के तहत इससे भी कम (कड़े) उत्सर्जन स्तर निर्धारित किए जा चुके हैं।
किन पर कब से होगा लागू?
दिल्ली-एनसीआर में औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्सर्जन की अधिकतम सीमा 50 मिलीग्राम प्रति घन मीटर निर्धारित करने के साथ इसे लागू करने की समयसीमा भी तय कर दी है। आयोग के अनुसार, बड़े और मध्यम उद्योगों को 1 अगस्त से नए नियमों का पालन करना होगा, जबकि अन्य उद्योगों के लिए यह 1 अक्टूबर से लागू होगा। इसके अलावा, राज्य सरकारों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को इन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
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